ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की बड़ी तैयारी, 15 महीनों में 15 घातक हथियारों के परीक्षण की योजना

नईदिल्ली 
बीते साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष भारतीयों की हत्या के बाद भारत का धैर्य जवाब दे दिया था. उसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादियों के कई ठिकानों को तबाह कर दिए. इस एक्शन में सैकड़ों की संख्या में ट्रेनिंग ले रहे आतंकवादी मारे गए. इससे पाकिस्तान बिलबिला गया. फिर दोनों मुल्कों के बीच 7 से 10 मई तक भीषण संघर्ष हुआ. भारत ने इन 72 घंटे में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और एयरबेस पर ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला किया. इससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा. इसके बाद 10 मई को संघर्ष विराम हुआ. भारत के इस ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ढांचे तबाह हुए थे. लेकिन इससे खतरा खत्म नहीं हुआ. बल्कि भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गईं. पाकिस्तान और उसकी सरपरस्ती में पल रहे आतंकी संगठन बदले की फिराक में हैं. ऐसे में भारत भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा है। 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों की रफ्तार पहले से कहीं अधिक तेज कर दी है. सरकार, सेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का पूरा फोकस अब भविष्य के युद्ध की तैयारी पर है. यही वजह है कि मई 2025 से अगस्त 2026 के बीच भारत ने कम से कम 15 बड़े रणनीतिक और सामरिक हथियारों का परीक्षण किया. यानी औसतन हर महीने एक बड़ा परीक्षण. यदि इसकी तुलना ऑपरेशन सिंदूर से पहले जनवरी 2024 से अप्रैल 2025 के बीच किए गए परीक्षणों से करें तो उस दौरान लगभग 12 बड़े परीक्षण हुए थे. इससे साफ संकेत मिलता है कि अब केवल हथियार विकसित करने पर नहीं, बल्कि उन्हें तेजी से सेना के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। 

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों बढ़ी परीक्षणों की रफ्तार?
ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सुरक्षा तंत्र को कई नए सबक दिए. संघर्ष के दौरान ड्रोन, लंबी दूरी के हथियार, एयर डिफेंस सिस्टम और सटीक हमलों की अहमियत साफ दिखाई दी. पाकिस्तान ने भी बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की. ऐसे में भारत ने यह महसूस किया कि भविष्य का युद्ध केवल सैनिकों के भरोसे नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक के दम पर लड़ा जाएगा. यही कारण है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिन हथियारों का परीक्षण हुआ, उनमें सबसे ज्यादा ध्यान एयर डिफेंस, लंबी दूरी की मिसाइलों और सटीक हमले करने वाली क्रूज मिसाइलों पर दिया गया। 

15 महीने में कौन-कौन से बड़े परीक्षण हुए?
    मई 2025 के बाद भारत ने एंटी-स्वॉर्म ड्रोन सिस्टम का परीक्षण किया, जो एक साथ आने वाले ड्रोन झुंड को नष्ट करने में सक्षम है. इसके बाद अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण हुआ, जिसने 5,000 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता को दोबारा प्रमाणित किया। 

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    दिसंबर 2025 में आकाश-एनजी और पनडुब्बी से दागी जाने वाली के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। 

    फरवरी 2026 में प्रोजेक्ट कुशा के पहले इंटरसेप्टर ने उड़ान भरी, जिसे भारत का स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम माना जा रहा है। 

    मई 2026 में अग्नि-5 के MIRV संस्करण का परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रहा. इससे एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर स्वतंत्र रूप से वार कर सकती है। 

    इसके बाद जून में 1,000 किलोमीटर तक मार करने वाली स्वदेशी लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल का परीक्षण हुआ। 

    जुलाई में कुशा इंटरसेप्टर ने नकली लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट किया.
    अगस्त 2026 में अग्नि-4 का सफल यूजर ट्रायल पूरा हुआ। 

भारत की सतह से हवा में मार करने वाली अग्नि-5 मिसाइल. फाइल फोटो- रायटर
ऑपरेशन सिंदूर से पहले कैसी थी तैयारी?

जनवरी 2024 से अप्रैल 2025 के बीच भी भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की थीं. इसी दौरान मिशन दिव्यास्त्र के तहत अग्नि-5 के MIRV संस्करण का पहला परीक्षण हुआ था. भारत हाइपरसोनिक हथियारों के क्लब में भी शामिल हुआ.

रुद्रम-2, अग्नि-प्राइम, आकाश-एनजी, वीएसएचओआरएडीएस, एमआरएसएएम और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर जैसे कई सिस्टम का परीक्षण इसी अवधि में हुआ. हालांकि उस समय इन परीक्षणों का मकसद नई तकनीकों का विकास और सत्यापन था, जबकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद फोकस इन प्रणालियों को जल्द से जल्द सेना में शामिल करने पर दिखाई देता है। 

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किस तैयारी में है भारत?
यदि इन सभी परीक्षणों को एक साथ देखें तो भारत की रणनीति तीन स्तरों पर साफ नजर आती है। 

पहला, देश एक मजबूत मल्टी रोल एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है. प्रोजेक्ट कुशा, आकाश-एनजी, एमआरएसएएम और एंटी-ड्रोन सिस्टम इसी रणनीति का हिस्सा हैं. उद्देश्य यह है कि दुश्मन की मिसाइल, ड्रोन या लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में प्रवेश करने से पहले ही नष्ट कर दिए जाएं। 

दूसरा, भारत अपनी लंबी दूरी की जवाबी हमला क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है. अग्नि-4, अग्नि-5, एमआईआरवी तकनीक और लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं. इनसे भारत जरूरत पड़ने पर हजारों किलोमीटर दूर स्थित सामरिक ठिकानों को बेहद सटीकता से निशाना बना सकता है। 

तीसरा, भारत भविष्य के हाई-टेक युद्ध की तैयारी कर रहा है. ड्रोन स्वॉर्म, हाइपरसोनिक हथियार, एआई के जरिए टार्गेट की पहचान और मल्टी लेयर एयर डिफेंस अब आधुनिक युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं. भारत इन सभी क्षेत्रों में तेजी से स्वदेशी क्षमता विकसित कर रहा है ताकि किसी भी संभावित संघर्ष में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो। 

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