इंदौर नगर निगम का अल्टीमेटम: व्यावसायिक इमारतों को नोटिस, बेसमेंट से बाजार हटाने का सख्त आदेश

इंदौर
इंदौर नगर निगम द्वारा शहर की व्यावसायिक इमारतों के तलघर में चल रही व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा गया है। निगम प्रशासन ने शहर की ऐसी 35 प्रमुख बिल्डिंगों को चिन्हित किया है, जहां बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के स्थान पर दुकानों या अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जा रहा था। इन सभी भवन स्वामियों को औपचारिक नोटिस जारी कर सख्त हिदायत दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमों का पालन सुनिश्चित करें। 

दस दिनों के भीतर पार्किंग व्यवस्था बहाल करने के निर्देश
नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा जारी किए गए इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भवन संचालकों को 10 दिन का समय दिया जा रहा है। इस अवधि के भीतर उन्हें तलघर में किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माण को हटाना होगा और वहां पार्किंग की व्यवस्था को फिर से सुचारू करना होगा। निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि इस समय सीमा के बाद भी भवनों में पार्किंग की जगह व्यापारिक गतिविधियां संचालित पाई गईं, तो निगम की टीम स्वयं वहां पहुंचकर निर्माण कार्य को ध्वस्त करने की सीधी कार्रवाई करेगी।

ये भी पढ़ें :  सीजफायर के बाद भागा शेयर बाजार, Sensex 2200 अंक बढ़ा , RIL-HDFC Bank में तूफानी तेजी

हर साल चलने वाले अभियान की सार्थकता पर सवाल
उल्लेखनीय है कि इंदौर नगर निगम द्वारा बेसमेंट की जांच और नोटिस देने की यह प्रक्रिया हर एक या दो साल में दोहराई जाती है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, हर बार भवन अधिकारियों और भवन निरीक्षकों द्वारा जोनल स्तर पर इमारतों की सघन जांच की जाती है और नोटिस भी बांटे जाते हैं। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि इन अभियानों का परिणाम अक्सर सिफर ही रहता है। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है, जिससे पार्किंग की समस्या जस की तस बनी रहती है।

ये भी पढ़ें :  मध्य प्रदेश के 53 आईएएस अफसर ट्रेनिंग लेने जाएंगे मसूरी, CM कार्यालय के भी कुछ अफसर हैं इसमें शामिल

जोनल कार्यालयों में सक्रिय हुए भवन अधिकारी और निरीक्षक
वर्तमान में नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के निर्देशों के बाद सभी जोनल कार्यालयों में तैनात भवन अधिकारी और भवन निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों की इमारतों का सर्वे कर रहे हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन इमारतों ने भवन अनुज्ञा के समय पार्किंग के लिए जगह मंजूर करवाई थी लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक निर्माण कर लिया। निगम का कहना है कि इस बार लापरवाही बरतने वाले भवन स्वामियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पार्किंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment