इंडक्शन या इन्फ्रारेड कुकटॉप कौन सा है आपके किचन के लिए बेहतर और क्यों इंडक्शन में पकता है खाना जल्दी

आज के मॉडर्न किचन में इंडक्शन और इन्फ्रारेड कुकटॉप तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. दोनों ही गैस के मुकाबले सुरक्षित और सुविधाजनक माने जाते हैं लेकिन जब बात स्पीड की आती है तो इंडक्शन अक्सर इन्फ्रारेड से आगे निकल जाता है. आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे छिपी साइंस को समझना दिलचस्प है.
कैसे काम करता है इंडक्शन कुकटॉप?

इंडक्शन कुकटॉप Electromagnetic Induction के सिद्धांत पर काम करता है. इसमें कुकटॉप के अंदर कॉइल होती है जो बिजली पास होने पर मैग्नेटिक फील्ड बनाती है. जब आप उस पर लोहे या स्टील के बर्तन रखते हैं तो वही बर्तन सीधे गर्म होने लगता है. यानी हीट सीधे बर्तन में पैदा होती है न कि कुकटॉप की सतह पर.

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इन्फ्रारेड कुकटॉप की तकनीक
इन्फ्रारेड कुकटॉप Infrared Radiation के जरिए काम करता है. इसमें हीट पहले कुकटॉप की सतह पर बनती है और फिर वहां से बर्तन तक पहुंचती है. इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है क्योंकि हीट ट्रांसफर दो स्टेप में होता है.

इंडक्शन क्यों है ज्यादा तेज?
इंडक्शन कुकटॉप की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह सीधे बर्तन को गर्म करता है. इसमें ऊर्जा का नुकसान बहुत कम होता है और लगभग तुरंत ही हीटिंग शुरू हो जाती है. दूसरी तरफ इन्फ्रारेड में पहले सतह गर्म होती है फिर बर्तन जिससे समय ज्यादा लगता है. यही कारण है कि इंडक्शन पर खाना जल्दी तैयार हो जाता है.

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एनर्जी एफिशिएंसी में भी आगे
इंडक्शन कुकटॉप लगभग 80-90% ऊर्जा को सीधे कुकिंग में इस्तेमाल करता है जबकि इन्फ्रारेड में यह प्रतिशत कम होता है. इससे न सिर्फ खाना जल्दी बनता है बल्कि बिजली की बचत भी होती है. इंडक्शन कुकटॉप सिर्फ तब ही गर्म होता है जब उस पर सही मेटल का बर्तन रखा हो इसलिए यह ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. वहीं इन्फ्रारेड कुकटॉप की सतह काफी गर्म हो जाती है जिससे जलने का खतरा रहता है. हालांकि इन्फ्रारेड में आप किसी भी तरह के बर्तन इस्तेमाल कर सकते हैं जबकि इंडक्शन में खास बर्तनों की जरूरत होती है.

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