मोहन यादव सरकार दिव्यांगजनों के लिए पहली बार नीति बनाएगी, 180 दिन में तैयार होगा ड्राफ्ट

भोपाल

मोहन यादव सरकार प्रदेश के दस लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार नीति बनाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सारे विभाग दिव्यांगजनों को लेकर एक प्लेटफार्म पर काम कर सकेंगे। यहां अलग-अलग विभागों के द्वारा अलग-अलग स्कीम के जरिए दिव्यांगजन को लाभ दिया जाता है। 

आयुक्त दिव्यांगजन डॉ अजय खेमरिया ने इस नीति को बनाए जाने को लेकर  चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांगजनों के लिए कोई नीति बनाने का काम राज्य सरकार करने जा रही है।

अभी अलग-अलग विभाग अलग-अलग स्कीम चलाते हैं। अभी कोई नीति नहीं होने से दिव्यांगजन के लिए समान काम नहीं हो पाता है। अभी दिव्यांगजनों के समग्र विकास के लिए जो काम हो रहे हैं, उसमें एकरूपता की कमी है, इसलिए दिव्यांगजन के लिए नीति बनाने की जरूरत है।खेमरिया ने कहा कि जिस तरह से एमपी के बच्चों के लिए बाल नीति है, महिला नीति है, उसी तरह की दिव्यांगजन नीति भी होना चाहिए।

एक्सपर्ट्स, दिव्यांगजनों से करेंगे बात
डॉ खेमरिया ने बताया कि नीति तैयार करने के लिए स्टेक होल्डर्स, एक्सपर्ट, हितग्राही से बात करेंगे। साथ ही विदेशों में जाकर वहां की स्थिति देखकर आने वाले, विश्वविद्यालयों में शोध करने वालों से बातचीत कर नीति बनाएंगे।

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एमपी के बाहर के विषय विशेषज्ञों से भी बात की जाएगी। ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों के साथ आदिवासी बेल्ट के लोगों से भी बात करेंगे। अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जैसे इलाकों में सरकार की योजनाओं की डिलीवरी में किस तरह की दिक्कत होती है, इसकी भी जानकारी ली जाएगी। वहां के दिव्यांग जन से बात की जाएगी।

अलग-अलग विभाग के अलग-अलग नार्म्स
दिव्यांगजन आयुक्त खेमरिया ने कहा कि अभी दिव्यांगों के लिए सामाजिक न्याय, एमएसएमई, एनआरएलएम, महिला बाल विकास विभाग समेत अन्य विभागों के अलग-अलग काम हैं। अगले छह माह में इसका ड्राफ्ट बना लिया जाएगा और कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर 2026 में ही इसे लागू कराया जाएगा।

फरवरी में सीएम को लिखा था पत्र
डॉ खेमरिया ने कहा कि नीति बनाने को लेकर फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पत्र लिखा था जिसके लिए मुख्यमंत्री ने अब अधिकृत कर दिया है। इसके अलावा सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को भी पत्र लिखा गया था।

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इसलिए अब दिव्यांग जन बनाने के लिए सुझाव लेने और प्रस्ताव मंगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए ऐसे लोगों से भी संपर्क किया जाएगा जो दिव्यांगजन के लिए काम करते हैं। जो दिव्यांग हैं, उनसे भी सुझाव लिए जाएंगे ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए नीति में वास्तविक प्रयास किए जा सकें।

इसके पहले कोई नीति नहीं है। अलग-अलग विभागों ने अपने हिसाब से दिव्यांगजन के लिए अलग रोस्टर, प्रावधान तय कर रखें हैं लेकिन विभागों की दिव्यांगजन को लेकर कोई नीति नहीं है। अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद इसके लिए नई नीति बनाकर उसे सभी विभागों में लागू कराया जाएगा।

नीति के लिए इनसे भी चर्चा करने के निर्देश
डॉ अजय खेमरिया को 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से एमपी में दिव्यांगजन अधिनियम 2016 राज्य निधि, निराश्रित निधि, के साथ योजनाओं, पुनर्वास और कल्याण से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल करते हुए दिव्यांगजन नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। शासन की ओर से कहा गया है कि विभिन्न विभागों, शासकीय और अर्द्धशासकीय संस्थाओं, एक्सपर्ट्स, संबंधित सिविल सोसायटी के सदस्यों, प्रख्यात खिलाड़ियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं से चर्चा कर नीति के मसौदे के निर्माण और उसे अंतिम रूप देने का काम किया जाए।

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तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की नीति का करेंगे अध्ययन

  •     इस नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।
  •     अभी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग अपनी-अपनी योजनाओं में दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।
  •     प्रदेश में 2011 की जनगणना और यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) के आधार पर करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं।
  •     आगामी जनगणना में दिव्यांगों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है, क्योंकि पहले जहां सात श्रेणियों के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे, वहीं अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा।
  •     नीति में यह भी प्रस्ताव रहेगा कि 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह स्थापित किए जाएं।

 

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