जबलपुर हादसे पर सवाल: जांच से पहले क्रूज तोड़ा, सबूत मिटाने के आरोप

जबलपुर.

बरगी बांध हादसे की जांच अभी जारी है, लेकिन हादसे में शामिल क्रूज को तोड़े जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। लापता पर्यटकों की की तलाश के बीच दुबे क्रूज को तट पर लाने के बाद शनिवार को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया था.

लोगों और मृतकों के स्वजन में गुस्सा बढ़ गया। उनका कहना है कि इस कदम से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं, जिससे हादसे की असली वजह सामने आना मुश्किल हो जाएगा।

एसपी बोले- फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा था क्रूज
अधिकारियों के बयान अलग-अलग सामने आए हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि क्रूज को अंदर फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा गया, जबकि पर्यटन मंत्री ने इसे निकालने के दौरान हुई क्षति बताया। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।

हवा और लहरों से टकराकर डूबने से सुरक्षा पर उठे सवाल
बरगी बांध में डूबा कू्ज फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) का था। क्रूज का दो वर्ष जुलाई, 2024 में पूर्ण रखरखाव किया गया था। इस क्रूज को वर्तमान में देश में प्रचलित क्रूजों में सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद तेज हवा और पानी की लहरों के भार को वह सहन नहीं कर सका।

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संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया
हादसे में बचे वकील रोशन आनंद समेत अन्य पर्यटकों ने भी क्रूज को समय से पहले तोड़े जाने को संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया। बढ़ते विरोध के बीच राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे
चंद मिनटों के अंदर डूब गया। जबलपुर के पास बरगी बांध में हुई इस घटना ने क्रूज की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़ कर दिए है। गुरुवार को घटना के समय क्रूज बरगी बांध में दूसरी बार राइड पर था। इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे। तभी लहरों के बीच वह डूब गया था।

19 वर्ष से लगातार चल रहा था
क्रूज का संचालन बरगी बांध से होता है। लेकिन क्रूज क्रय करने की प्रक्रिया और संचालन को लेकर व्यवस्था पर्यटन विभाग मुख्यालय अपने स्तर पर करता है। जिस क्रूज में हादसा हुआ इसे मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने लिया था, 19 वर्ष से लगातार चल रहा था।

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निर्माता कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज
क्रूज की 80 यात्री क्षमता थी। लोअर डेक एयर कंडीशनर था, जिसमें 30 यात्री सवार हो सकते थे। अपर डेक (खुला) की क्षमता 50 यात्रियों की थी। एमपीटी के कमांडर राजेंद्र निगम ने बताया कि यह क्रूज हैदराबाद बोट क्लब से खरीदा गया था।

कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी
संबंधित कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी है। यह क्रूज कैटामारन हाल तकनीक से बना था, जिसमें दो बोट को जोड़कर एक बड़ी बोट बनाई जाती है। यह क्रूज की वर्तमान में देश में प्रचलित आधुनिक तकनीक में से एक बताई जा रही है।

जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता
दो बोट को जोड़कर बनाए जाने वाले शिप का संतुलन पानी में बेहतर होता है। इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। फाइबर रिनइनफोर्स प्लास्टिक सामग्री के उपयेाग के कारण इसमें जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता है।

हवा से पलटा, लहर से क्षतिग्रस्त हुआ, पानी भरा और डूबा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब क्रूज राइड पर निकला था तो मौसम सामान्य था। जब वह सफर पर आधी दूरी में पहुंचा तभी हवा तेज हो गई। क्रू केप्टन ने क्रूज को मोड़कर वापस लाना चाहा, लेकिन तभी तेज हवा और बांध के पानी में उठती लहरों से क्रूज डगमगाने लगा।

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लहरे लगातार क्रूज को ढकेल रही थी
तेज लहरों के कारण क्रूज का एक भाग क्षतिग्रस्त हुआ। जहाज को आगे बढ़ाने और उसे घुमाने वाले प्रापेलर्स को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। आशंका है कि पानी की एक लहर ने क्रूज को नीचे की ओर खींचा और दूसरी लहर से उसे उफर उठाया। इसी दौरान वह पलटा और डूब गया।

अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी
क्रूज में अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी, लेकिन घटनाक्रम तेजी से घटा। क्रूज में मौसम की जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं था। संचालन से संबंधित जिम्मेदार मौसम विभाग की जारी होने वाली रिपोर्ट और स्थानीय मौसम की स्थितियों को देखकर क्रूज के संचालन का निर्णय करते थे।

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