रुपये को संभालने के लिए RBI की तैयारी, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

नई दिल्‍ली
डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही रिकॉर्ड गिरावट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस गिरावट को थामने और अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए केंद्रीय बैंक अब कुछ सख्त कदम उठा सकता है. ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी भी केंद्रीय बैंक कर सकता है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत शीर्ष अधिकारियों ने हाल के दिनों में बैठकें की हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने से लेकर विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तमाम कड़े विकल्पों पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है। 

इस सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरकर लगभग 97 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस तेज गिरावट ने केंद्रीय बैंक की नींद उड़ा दी है. रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी में खूब काम आ सकती है. केंद्रीय बैंक इस विकल्प पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है. आरबीआई की अगली एमपीसी मीटिंग 5 जून से शुरू होगी, लेकिन संकट की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व बैंक तय कार्यक्रम से पहले भी इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर दरों में बदलाव कर सकता है. इससे पहले मई 2022 में भी आरबीआई तय शेड्यूल से अलग जाकर अचानक ब्याज दरें बढ़ा चुका है। 

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लोन हो जाएंगे महंगे
यदि आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से कर्ज महंगा मिलेगा. नतीजा यह होगा कि कमर्शियल बैंक भी आम जनता के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे, जिससे आम आदमी पर मासिक ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा। 

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2013 वाले फॉर्मूले की तैयारी
रुपये में गिरावट की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है. हालांकि, देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और बैंकिंग प्रणाली भी पूरी तरह स्थिर है, लेकिन वैश्विक दबाव के चलते यह मजबूती विनिमय दर (Exchange Rate) में दिखाई नहीं दे रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई साल 2013 के “टेपर टैंट्रम” संकट के दौरान आजमाए गए फॉर्मूले को दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है. उस समय भी रुपये को बचाने के लिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय बैंकों के माध्यम से एनआरआई (NRI) जमा योजनाएं शुरू की गई थीं। 

रुपये की सेहत सुधारने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना बेहद जरूरी है. इसके लिए आरबीआई इस बार बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की प्लानिंग कर रहा है. आरबीआई का अनुमान है कि अप्रवासी भारतीयों के लिए विशेष डिपॉजिट स्कीम लाकर इस बार लगभग 50 अरब डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं, जबकि 2013 के संकट के दौरान इसके जरिए 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे। 

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इन पर भी हो रहा विचार
डॉलर की किल्लत दूर करने के लिए अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ अतिरिक्त करेंसी स्वैप एग्रीमेंट किए जा सकते हैं. संप्रभु डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bond): विदेशों से सीधे डॉलर जुटाने के लिए सरकार की मदद से डॉलर बॉन्ड जारी करने पर भी विचार हो रहा है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार को लेना होगा। 

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