भोपाल मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में अब प्रोफेसरों और शिक्षकों के लिए कॉलेज से गायब होना मुश्किल हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने एक सख्त कदम उठाते हुए सभी सरकारी कॉलेजों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। नए नियमों के तहत शिक्षकों, खेल अधिकारियों, लाइब्रेरियनों, और अतिथि विद्वानों को न्यूनतम 6 घंटे कॉलेज में उपस्थित रहना होगा। यदि कोई प्रोफेसर या कर्मचारी इन नियमों का पालन नहीं करता, तो उसका वेतन कटेगा। यह फैसला मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की…
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2025-26 से आयुर्वेद कॉलेजों में आधार आधारित उपस्थिति जरूरी
भोपाल शैक्षणिक सत्र 2025-26 से आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा कॉलेजों की मान्यता के लिए फैकल्टी की आधार के माध्यम से उपस्थिति ही मान्य की जाएगी। कॉलेज में उपस्थिति दर्ज करते ही भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआइएसएम) में उपस्थिति लग जाएगी। टीचर कोड एक वर्ष के लिए कॉलेजों की मान्यता के दौरान यही उपस्थिति मान्य की जाएगी। चाहे वह नया कॉलेज प्रारंभ करने के लिए हो या फिर सीटों में वृद्धि के लिए। ऐसे फैकल्टी जो सिर्फ निरीक्षण के समय दिखते हैं, बाकी दिनों में उनकी उपस्थिति के प्रमाण नहीं…
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