भोपाल राजधानी के अवधपुरी क्षेत्र की एक कवर्ड कॉलोनी में इन दिनों एक ''आवारा कुत्ते'' चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां कालोनी से श्वानों को बाहर निकालने का फैसला ''भेल'' के जिम्मेदार कर्मचारियों पर इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी होली और रंगपंचमी सड़कों पर खाक छानते हुए बितानी पड़ी। मामले में मेनका गांधी की सक्रियता और प्रशासन के कड़े रुख ने कॉलोनी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी। पदाधिकारी जिन सरकारी…
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