नई दिल्ली भारत सरकार देश में खेती के लिए सबसे जरूरी यूरिया (Urea) खाद की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. सरकार ने एक नई निवेश नीति तैयार की है, जिसके लिए एक कैबिनेट नोट भी बना लिया गया है. इस नई नीति का मुख्य मकसद देश में यूरिया के नए कारखाने लगाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, ताकि विदेशों से खाद न मंगानी पड़े. फिलहाल भारत में यूरिया की जितनी जरूरत है और जितनी पैदावार हो रही है, उसके बीच…
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अब किसान करेंगे खाद की ऑनलाइन बुकिंग, एमपी के सवा करोड़ किसानों की पोर्टल पर मैपिंग
भोपाल एमपी में बुआई के हर मौसम में किसानों की खाद लेने के लिए लगी कतारें सरकार और पब्लिक दोनों को परेशान करती हैं। अब सरकार किसानों को खाद की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा देने जा रही है। यही नहीं खाद की होम डिलेवरी सेवा पर भी काम चल रहा है। मप्र के कृषि विभाग ने एग्रीस्टेक पोर्टल पर सवा करोड़ किसानों की पूरी डिटेल दर्ज कराई है। इसमें किसान की खेती की भूमि का रकबा और उसमें बोई जाने वाली फसलों के साथ ही लगने वाली खाद की भी…
Read Moreसरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में किसानों को उपलब्ध कराए रिकॉर्ड 834.64 लाख टन उर्वरक
नई दिल्ली सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश में उर्वरकों की जरूरत लगभग 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) आंकी गई थी, जिसके मुकाबले सरकार ने करीब 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरक उपलब्ध कराए। सरकार ने कहा कि किसानों की खेती से जुड़ी जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए 2024-25 में रिकॉर्ड मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि यह अतिरिक्त उपलब्धता किसानों की मदद करने और देशभर में खेती का काम बिना रुकावट चलाने के…
Read Moreई-टोकन से किसानों को घर बैठे खाद, लंबी कतारों से मिली राहत; जनवरी से प्रदेशभर में लागू
जबलपुर किसानों को रसायनिक खाद वितरण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए कृषि विभाग ने लगातार अनेक उपाय किए पर सफलता नहीं मिली। वितरण केंद्रों में खाद पाने किसानों की कतार लंबी होती गई। स्थाई समाधान की दिशा में कार्य करते हुए शासन ने एक अक्टूबर 2025 से खाद वितरण की नई व्यवस्था ‘ई-टोकन’ का प्रयोग किया। इसके बेहतर परिणाम सामने आए। किसानों से प्राप्त फीडबैक के बाद यह व्यवस्था अब एक जनवरी 2026 से प्रदेशभर में लागू की जा रही है। जबलपुर, विदिशा और शाजापुर जिलों…
Read MoreMP में खेती का रकबा घटा, लेकिन रासायनिक खाद की खपत पहुंची रिकॉर्ड स्तर पर
भोपाल मध्य प्रदेश में खेती का रकबा हर साल घटने के बावजूद रासायनिक खाद की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। जैविक खेती के मामले में देश में पहले स्थान पर होने के बाद भी किसानों की रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि जिस तरह से अधिक उत्पादन के लिए मृदा की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है, वह खतरनाक है। रासायनिक खाद के बढ़ते उपयोग से हर फसल सीजन में खाद की किल्लत की सूचनाएं आम हो चली हैं। वर्ष 2022-23…
Read Moreखाद की कालाबाजारी रोकने सरकार की नई पहल, किसानों को मिलेगा डेबिट कार्ड से खाद
राजगढ़ मध्यप्रदेश में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए किसानों को डेबिट कार्ड पर खाद देने की व्यवस्था बनाई जा रही है। राजगढ़ में भी जिले की 140 सहकारी समितियों में किसानों को डेबिट कार्ड के जरिए खाद देने की व्यवस्था की जा रही है। सहकारी बैंकों से सबद्ध किसानों को अब डेबिट कार्ड मुहैया कराया जाएगा। इसी के माध्यम से उन्हें रबी और खरीफ के सीजन में खाद मिलेगा। यानी एटीएम की तर्ज पर कम्प्यूटरीकृत ब्रांच में जाकर उन्हें कार्ड स्वैप करना होगा, तभी खाद मिल पाएगा। डेबिट कार्ड…
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