धार की भोजशाला पर नई रिपोर्ट, ASI ने हाई कोर्ट को बताया—शिलालेखों से छेड़छाड़ के संकेत

धार ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर इतिहास के सबसे संवेदनशील सवालों के केंद्र में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की मैसूर स्थित एपिग्राफी (उत्कीर्णित लेखों का अध्ययन) शाखा ने वर्ष 2024 के सर्वे के दौरान यहां 244 शिलालेखों का विस्तृत अध्ययन किया था। ये शिलालेख 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच के माने जा रहे हैं। इन पर नागरी लिपि में संस्कृत, प्राकृत तथा स्थानीय बोली में रचनाएं अंकित हैं। सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई शिलालेखों के अक्षर जानबूझकर छेनी से मिटाए गए और उन्हें…

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