बाघ संरक्षण की वैश्विक मिसाल बना मध्यप्रदेश

नवाचार, सुशासन, जन-सहभागिता और सतर्क निगरानी तंत्र से ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान हुई सशक्त भोपाल मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से भारत का हृदय प्रदेश है। जैव-विविधता और वन्यप्राणी संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश राष्ट्रीय के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश का लगभग एक-तिहाई भू-भाग वनाच्छादित है, यही कारण है कि यहां वन्यजीवों, विशेषकर बाघ, तेंदुआ, चीता जैसी बिग-कैट प्रजाति के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में कराई गई बाघ गणना के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ पाए…

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मध्य प्रदेश के बाघ छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा में भी दहाड़ेंगे, बाघ संरक्षण के लिए बड़ा कदम

भोपाल  गुजरात के बाद अब छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा में भी मध्य प्रदेश के बाघ दहाड़ेंगे। राज्य सरकार इन तीनों राज्यों को 15 बाघ देगी। इनमें छत्तीसगढ़ को आठ बाघ (दो बाघ, छह बाघिन), राजस्थान को चार बाघिन एवं ओडिशा को तीन (एक बाघ, दो बाघिन) दिए जाएंगे। इसको लेकर सहमति बन गई है। मध्य प्रदेश वन विभाग मुख्यालय ने वन्यप्राणी शाखा के पीसीसीएफ सुभरंजन सेन से कहा है कि बांधवगढ़, पेंच एवं कान्हा टाइगर रिजर्व से ये बाघ भेजे जाएंगे। इसके लिए यह शर्त भी रखी गई है कि…

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