जबलपुर में 7 साल पहले स्वीकृत फ्लाईओवर का अब तक काम शुरू नहीं हुआ, हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया

जबलपुर

मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर की सबसे बड़ी ट्रैफिक समस्याओं में से एक अंबेडकर चौक से अब्दुल हमीद चौक तक के मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण की योजना, जो वर्ष 2019 में स्वीकृत हुई थी, अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है।

जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी, शहरी विकास विभाग के सचिव और जबलपुर कलेक्टर समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

2019 में मिली थी मंजूरी, 2024 तक सिर्फ बढ़ती गई लागत

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फ्लाईओवर की शुरुआती योजना 3.2 किलोमीटर लंबी थी, जिसकी लागत 186 करोड़ रुपए तय की गई थी। हालांकि, 2024 में इसकी लंबाई बढ़ाकर 5.1 किलोमीटर कर दी गई और बजट भी तीन गुना तक बढ़ाया गया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। हाईकोर्ट ने इस देरी पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि जब स्वीकृति और बजट दोनों पहले ही तय हो चुके हैं, तो आखिर निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ?

सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक इलाके में स्वीकृत है फ्लावर

आपको बता दे की अंबेडकर चौक से लेकर अब्दुल हमीद चौक तक स्वीकृत यह फ्लाईओवर शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक है। अंबेडकर चौक से लेकर घमापुर चौक तक हर वक्त जाम की स्थिति लगी रहती है। उसके बावजूद यहां फ्लाईओवर ना बनना अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है। जबकि यहां पर स्थानीय प्रतिनिधि से लेकर आम लोगों ने कई बार फ्लाईओवर की मांग की है।

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घंटों जाम में फंसते हैं लोग

अंबेडकर चौक से घमापुर और अब्दुल हमीद चौक तक का इलाका जबलपुर का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है, जहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। ट्रैफिक की परेशानी से जूझ रहे स्थानीय लोगों ने कई बार फ्लाईओवर की मांग उठाई है। इसके बावजूद शासन और प्रशासन की उदासीनता से यह परियोजना केवल कागज़ों में ही सिमटी रह गई है।

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हाईकोर्ट की सख्ती से जागेगा सिस्टम?

हाईकोर्ट (MP High Court) द्वारा अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब इस फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर कुछ ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी। यह मामला ना केवल एक शहरी विकास परियोजना से जुड़ा है, बल्कि यह जनता की रोजमर्रा की परेशानियों और शासन की जवाबदेही से भी सीधा संबंध रखता है। सात साल पुरानी मंजूरी के बावजूद अगर एक जरूरी फ्लाईओवर का काम शुरू नहीं हो पाया है, तो ऐसी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना लाजिम है।

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