मकर संक्रांति पर स्नान न किया तो क्या होती है सजा?

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में शुभ प्रवेश का प्रतीक है, जो उसकी उत्तर दिशा की यात्रा का संकेत देता है. हिंदू परंपरा में सूर्य की इस गति को बढ़ती रोशनी, गर्मी और नई ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसलिए इस त्योहार को शारीरिक शुद्धि, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक उत्थान के लिए एक शक्तिशाली समय माना जाता है. मकर संक्रांति का त्योहार को लेकर इस बार कंफ्यूजन की स्थिति हुई. कई जगह आज मनाया जा रहा और कई जगह कल मनाया जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि इस त्योहार पर स्नान न करने पर श्रद्धालु के जीवन में किस तरह का प्रभाव पड़ता है?

सबसे पहले बात करते हैं कि मकर संक्रांति को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति क्यों हुई? दरअसल, कई पंचांगों में कहा गया है कि ये त्योहार 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा, लेकिन काशी के पंचांग में दावा किया गया है कि सूर्यदेव मकर राशि में 14 जनवरी रात 9 बजकर 19 मिनट पर प्रवेश करेंगे. यही कारण है कि अगले दिन उदया तिथि में त्योहार मनाया जाएगा. इसके अलावा एक तर्क ये भी दिया जा रहा था कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते चालव या अन्न दान नहीं किया जा सकता है. इसे अगले दिन ही मनाना शुभ रहेगा. आखिरकार 15 जनवरी को त्योहार को मनाना शुभ माना गया है.

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मकर संक्रांति पर स्नान, ध्यान, दान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है. अगर कोई श्रद्धालु मकर संक्रांति पर स्नान नहीं करता है तो उसे सजा के तौर पर उसके जीवन में कई चीजें घटित हो सकती हैं. मान्यता है कि इस त्योहार पर पवित्र नदियों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता है. खासकर गंगा में स्नान करने का अपना एक महत्व है. इससे पिछले पापों का विनाश होता है, जो भी व्यक्ति घर पर और पवित्र नदी में स्नान नहीं करता है वो विशेष पुण्य लाभ से वंचित रह सकता है.

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मकर संक्रांति पर स्नान न करने से मनुष्य बनता है दरिद्र?

मान्यता ये भी है कि सूर्यदेव के उत्तरायण होने की वजह से प्रकृति में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है. कहा गया है कि स्नान न करने से शरीर में तामसिक ऊर्जा और आलस्य बना रहता है. इसकी वजह से सुबह का स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, जोकि नई ऊर्जा के संचार के लिए बहुत जरूरी होता है. कुछ पौराणिक कथाओं में जिक्र किया गया है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति जैसे पर्व पर स्नान और दान नहीं करता, वह अगले जन्म में दरिद्र या रोगों से ग्रसित हो सकता है.

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शनिदेव हो जाते हैं नाराज!

मान्यता के मुताबिक, मकर संक्रांति पर स्नान और दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा बरसती है क्योंकि सूर्य देव के बेटे शनि अपने पिता का स्वागत इस दिन करते हैं. स्नान की अनदेखी करने से इन ग्रहों के शुभ प्रभाव में कमी आ सकती है. अगर कोई श्रद्धालु स्वास्थ्य कारणों या अन्य मजबूरी से नदी में पवित्र स्नान नहीं कर पार रहा है तो उसके लिए एक अलग तरह का विधान है. वह श्रद्धालु घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल डाले और काले तिल मिलाकर स्नान करे. इससे संक्रांति का पूरा पुण्य मिलेगा.

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