बंगाल में किसकी सरकार बनेगी? कोलकाता, हावड़ा और 24 परगना की 91 सीटें तय करेंगी परिणाम

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आगामी 4 मई को सामने आ जाएंगे। इससे पहले राज्य में सियासी पारा हाई है। पहले चरण के चुनावों में बंपर वोटिंग के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी को इस बार बंगाल में बदलाव की उम्मीद है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर जीत का दावा कर रही हैं। ऐसे में मतगणना के दिन का बेसब्री से इंतजार है। इतिहास की बात करें तो उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों या जंगलमहल के वनक्षेत्र की सरकार बनाने में बहुत कम भूमिका होती है। यहां आमतौर पर सत्ता का फैसला दक्षिणी बंगाल के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से ही होता है और इस बार भी निगाहें इन्हीं सीटों पर टिकी हैं।

उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले इस चुनावी जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। यह दोनों जिले कोलकाता और हावड़ा के साथ तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए यह सत्ता हासिल करने का महत्वपूर्ण रास्ता है। भाजपा सत्तारूढ़ पार्टी के दक्षिणी गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जिसके साथ दो सबसे बड़े जिले, 33 सीट वाला उत्तर 24 परगना और 31 सीट वाला दक्षिण 24 परगना, एक बार फिर बंगाल के चुनाव जीतने की कुंजी साबित होंगे।

ये भी पढ़ें :  गणपति मूर्ति विसर्जन: एनजीटी के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत न्यायालय

ये हैं सबसे निर्णायक क्षेत्र
कोलकाता की 11 सीट और हावड़ा की 16 सीट के साथ, ये चार जिले बंगाल विधानसभा की 294 सीट में से 91 सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सदन का लगभग एक तिहाई हिस्सा होने के कारण 2026 के चुनावों में सबसे निर्णायक क्षेत्र बन जाते हैं। वहीं उत्तर और दक्षिण 24 परगना उस मुकाबले का केंद्र बने हुए हैं, जिसे बंगाल के राजनेता अक्सर ''बंगाल के उत्तर प्रदेश का चुनावी नक्शा'' कहते हैं। यह वह क्षेत्र है जो राज्य सचिवालय नबान्न में सत्ता बना या बिगाड़ सकता है।

ये भी पढ़ें :  अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बड़ा ड्रग्स रैकेट बेनकाब, 12.50 करोड़ की खेप जब्त, 4 तस्कर गिरफ्तार

प्रेसिडेंसी प्रभाग में कोलकाता, हावड़ा, नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना शामिल है तथा यहां 111 सीट है, जो तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ बना हुआ है। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के मजबूत प्रयासों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने इन 111 में से 96 सीट जीतीं, जबकि भाजपा को केवल 14 और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) को एक सीट ही मिल पाई। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत की और यहां की 21 सीट पर बढ़त हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 90 सीट में आगे रही।

ये भी पढ़ें :  देश की सबसे बड़ी विपणन कंपनी इंडियन ऑयल ने 22,000 करोड़ का प्रस्तावित राइट्स इश्यू लिया वापस

TMC-BJP दोनों को उम्मीद
तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी गणित बिल्कुल स्पष्ट है। वह अगर इस स्थिति को बरकरार रखती है तो उसका लगातार चौथी बार सत्ता में आने का रास्ता खुला रहेगा। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, “अगर हम उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा को अपने पास बनाए रखते हैं, तो बंगाल हमारे पास रहेगा। ये सिर्फ सीट नहीं हैं, ये ममता बनर्जी की राजनीति का सामाजिक आधार हैं।” जबकि भाजपा इसी भौगोलिक क्षेत्र को सत्ता परिवर्तन का मार्ग मानती है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "उत्तर 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा में पैठ बनाए बिना हमारे लिए सत्ता तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। मतुआ और शरणार्थी वोट के कारण उत्तर 24 परगना ही हमारे लिए सत्ता का प्रवेश द्वार है।"

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment