ड्रोन और मिसाइलों के दौर में भी क्यों खत्म नहीं हुई टैंकों और थल सेना की ताकत?

नई दिल्ली
पहले रूस-यूक्रेन और फिर ईरान बनाम इजरायल-अमेरिका। पिछले कुछ सालों में दुनिया दो बड़ी जंगें देख चुकी है। हालांकि, भारत-पाकिस्तान के बीच भी इस दौरान एक छोटा युद्ध हुआ, लेकिन लंबे कालखंड में रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल की जंग ही चली। इन दोनों जंगों में दुनिया ने देखा कि कैसे आधुनिक युद्ध का मैदान पूरी तरह से बदल चुका है। पैदल सैनिकों, बंदूकों और तोप की जगह अब मिसाइल, एयरक्राफ्ट और ड्रोन ने ले ली है। तो सवाल उठता है कि क्या थल सेना और तोपों की अहमियत अब खत्म हो गई है? इसका जवाब है-नहीं।

डिफेंस एक्सपर्ट से जानें सब
दरअसल, सैन्य एक्सपर्ट्स का तर्क है कि चाहे ड्रोन हों या फाइटर जेट ये दोनों ही जंग के असली मकसद को हासिल नहीं कर सकते, यानी किसी इलाके पर कब्जा नहीं कर सकते। आइए, यूक्रेन से मिले सबक और डिफेंस एक्सपर्ट की राय के आधार पर इस बात का विश्लेषण करते हैं कि युद्ध के तरीकों में तेजी से बदलाव के बावजूद टैंक और जमीनी सेना क्यों अब भी बेहद जरूरी हैं।

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टैंक अब भी जरूरी क्यों?
जब 500 डॉलर का ड्रोन और 30,000 डॉलर की एंटी-टैंक मिसाइल करोड़ों की कीमत वाले टैंक को तबाह कर सकती है तो यह सवाल पूछा जा सकता है कि टैंकों पर निवेश क्यों करना चाहिए? ये सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है, क्योंकि सोशल मीडिया पर यूक्रेन की सड़कों पर जलते हुए टैंकों के वीडियो भरे पड़े हैं। इससे लोगों को लगने लगा है कि टैंक अब बेकार हो चुके हैं। लेकिन कई सेनाएं बख्तरबंद युद्ध (आर्मर्ड वॉरफेयर) को छोड़ नहीं रही हैं। असल में कुछ सेनाएं तो इस पर और ज्यादा जोर दे रही हैं।

टैंक में आज भी ये खूबियां
वर्तमान स्थिति में टैंकों को छोड़ना नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल के तरीके पर फिर से सोचना ही समझदारी का काम है। दरअसल, टैंकों में आज भी ऐसी खूबियां हैं जिनका मुकाबला शायद ही कोई और हथियार कर सके। इसमें तेजी से चलने की क्षमता (मोबिलिटी), सुरक्षा और जबरदस्त मारक क्षमता (फायरपावर) एक अनोखा मेल है।

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टैंक की खासियत
    ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकते हैं
    ऐसे हमले झेल सकते हैं, जिनसे गाड़ियां तबाह हो जाएं
    मजबूत ठिकानों पर जबरदस्त हमला कर सकते हैं
    टैंक कॉम्बिनेशन 'शॉक इफेक्ट' पैदा करता है

घुटने टेकने पर करते हैं मजबूर
टैंकों से एक ऐसा मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक फायदा मिलता है, जो बिना तैयारी वाले बचाव करने वालों को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है। आधुनिक युद्ध अब सिर्फ टैंकों के अकेले काम करने तक सीमित नहीं है। आज के जमाने में अलग-अलग तरह की सेनाओं को एक साथ मिलाकर काम करना ही सबसे बेहतर माना जाता है। 'कंबाइंड आर्म्स ऑपरेशन्स' में टैंक पैदल सेना (इन्फैंट्री), UAV, इंजीनियर और आर्टिलरी के साथ मिलकर बहुत अच्छी तरह से तालमेल बिठाकर हमले करते हैं।

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टैंकों को बचाती है पैदल सेना
हमने हाल ही में देखा है कि गाजा या दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना शायद ही कभी पैदल सेना की सुरक्षा और लगातार ड्रोन की निगरानी के बिना मर्कावा टैंक तैनात करती है। पैदल सेना टैंकों को RPG जैसे करीबी खतरों से बचाती है, ड्रोन आगे जाकर जानकारी जुटाते हैं और आर्टिलरी दुश्मन के मजबूत ठिकानों को दबाती है। जब यह तालमेल सही तरीके से किया जाता है तो अकेले काम करने पर टैंकों को जिन खतरों का सामना करना पड़ता है, वे काफी कम हो जाते हैं।

 

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