दिल्ली में सत्ता tussle: विधानसभा स्पीकर पद पर भाजपा और JDU दोनों ने किया दावा, ललन सिंह-संजय झा पहुंचे राजधानी

नई दिल्ली

बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद चल रही है. मंगलवार को जेडीयू और भाजपा दोनों दलों के विधायक दलों की बैठक होने वाली है. इन बैठकों में दोनों दल अपने-अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे. इस बीच मंत्रिमंडल के स्वरूप और मंत्री पद को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा चल रही है. अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दल बिहार सरकार में बराबर मंत्री पद लेंगे. इस बीच सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि दोनों दल विधानसभा अध्यक्ष पद चाहते हैं. इसी के मद्देनजर जेडीयू-बीजेपी के शीर्ष नेता आज दिल्ली में मीटिंग करेंगे. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और जेडीयू कोटे के केंद्रीय मंत्री ललन सिंह बीती रात पटना से दिल्ली रवाना हुए थे. मंगलवार को ये दोनों नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें :  महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का नतीजा आए करीब 10 होने वाले हैं, लेकिन अब तक नई सरकार का गठन नहीं हो सका

स्पीकर के अलावा सरकार में महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी दोनों दलों की ओर से दावेदारी चल रही है. बीजेपी हर हाल में स्पीकर का पद अपने पास रखना चाहती है. सोमवार देर रात तक पटना में प्रदेश बीजेपी के नेताओं ने इस पर चर्चा की थी. इसके अलावा चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा से बातचीत का जिम्मा धर्मेंद्र प्रधान संभाल रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों सहयोगी दलों के साथ सरकार गठन को लेकर सहमति बन चुकी है.

ये भी पढ़ें :  महाराष्ट्र निकाय चुनाव में BJP का जलवा, शिवसेना-NCP के साथ 200+ सीटों पर बढ़त; मतगणना जारी

छोटे दलों से बात कर रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान

इस बीच बुधवार 19 नवंबर को बीजेपी और जेडीयू विधानमंडल दल की अलग–अलग बैठकें बुलाई गई हैं. दोनों दलों की बैठक के बाद एनडीए विधानमंडल दल की बैठक भी 19 नवंबर को होगी. 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा.

मौजूदा विधानसभा में तीन बार स्पीकर बदल चुके हैं. फिलहाल यह पद भाजपा के नंदकिशोर यादव के पास है. इससे पहले जेडीयू और राजद के बीच गठबंधन के वक्त स्पीकर पद राजद के अवध बिहारी चौधरी के पास था. उससे पहले भाजपा के विजय सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष थे. हालांकि, इससे पहले यानी 2020 से पहले नीतीश कुमार की जेडीयू ने हमेशा अपने पास विधानसभा अध्यक्ष का पद रखा. विधायकों की अदला-बदली या फिर कमजोर बहुमत वाली सरकार होने की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष का पद राजनीतिक रूप से काफी अहम हो जाता है. वैसे एक मजबूत सरकार होने की स्थिति में इस पद को पार्टियां अपने किसी वरिष्ठ नेता को समायोजित करने का जरिया मानती हैं.

ये भी पढ़ें :  हैदराबाद में हिंदू लड़कियों के साथ कथित अपराध, मंत्री ने AIMIM पर गंभीर आरोप लगाए

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment