छत्तीसगढ़ के पूर्व DGP विश्वरंजन का निधन, पटना के अस्पताल में ली अंतिम सांसें

रायपुर 
छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh Police) महकमे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) विश्वरंजन का निधन हो गया है। कार्डियक (दिल से जुड़ी) समस्या के चलते पिछले करीब एक महीने से पटना के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। एक दिन पहले ही क्रिटिकल कंडीशन को देखते हुए उन्हें डायलिसिस पर रखा गया था। उनके निधन से पूरे छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और पुलिस अमले में शोक की लहर दौड़ गई है।

1973 बैच के IPS, 4 साल तक संभाली CG पुलिस की कमान

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विश्वरंजन 1973 बैच के बेहद तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी थे। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था। जुलाई 2007 में उन्हें छत्तीसगढ़ का छठवां DGP बनाया गया था। जुलाई 2011 तक करीब 4 साल उन्होंने इस अहम जिम्मेदारी को संभाला। नक्सल प्रभावित (Naxal-hit) इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में उनका बड़ा रोल रहा। इससे पहले वह लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पदों पर भी सेवाएं दीं।

पूर्व डीजीपी विश्वरंजन की तबीयत पिछले महीने अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा था।

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बताया जा रहा है कि उन्हें गंभीर कार्डियक (हृदय) संबंधी समस्या हुई थी। इसी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।

छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे विश्वरंजन

विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे हैं। 2007 में तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के निधन के बाद राज्य सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी। वे लगभग चार वर्षों तक इस पद पर रहे और अपने कार्यकाल के दौरान पुलिस प्रशासन में कई अहम सुधार किए।

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उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

आईबी में भी रहे लंबे समय तक

1973 बैच के आईपीएस अधिकारी विश्वरंजन का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था, हालांकि 2007 से पहले वे कभी छत्तीसगढ़ में पदस्थ नहीं रहे थे।

वे लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर जैसे अहम पद भी संभाले।

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