राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर हमला, बोले- RSS को प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं

नई दिल्ली
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने संगठन की तुलना मां के प्रेम से करते हुए कहा कि RSS को किसी रजिस्ट्रेशन, प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह राष्ट्रसेवा के भाव से काम करने वाला एक सभ्यतागत संगठन है.

दरअसल, दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि संघ ने हमेशा 'राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम' की भावना से काम किया है. इसी का परिणाम है कि आज RSS दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है.

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उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'हाल ही में कांग्रेस के एक बड़े नेता पूछ रहे थे कि RSS रजिस्टर्ड क्यों नहीं है. ऐसी बातों का जवाब नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि संविधान हर व्यक्ति को संगठन बनाने का अधिकार देता है."

राजनाथ सिंह ने अपनी बात को उदाहरणों के जरिए समझाते हुए कहा, 'मां के प्रेम का कोई लाइसेंस नहीं होता. गुरु के संस्कार किसी सरकारी मुहर के मोहताज नहीं होते. मां गंगा को बहने के लिए लाइसेंस नहीं चाहिए और सूर्य को प्रकाश देने के लिए रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती.'

उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह RSS एक Civilisational Force है, जिसे किसी सर्टिफिकेशन या वैलिडेशन की जरूरत नहीं है. संघ 'सेवा धर्मः परमः श्रेयः' की भावना के साथ लगातार राष्ट्रसेवा में लगा हुआ है और आगे भी इसी भावना से कार्य करता रहेगा.

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कांग्रेस ने संगठन के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठाए थे सवाल
बता दें कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में है. इसको लेकर हाल ही में कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित पत्र में कई सवाल उठाए थे. इस पत्र को प्रियांक ने एक्स पर भी पोस्ट करते हुए पूछा था कि भारत का सबसे बड़ा सोशियो-कल्चरल संगठन बिना रजिस्ट्रेशन के क्यों काम कर रहा है.

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उन्होंने संगठन की फंडिंग, उसके टैक्स कम्प्लायंस और ऑडिट की जरूरत का मुद्दा भी उठाया था. इस पत्र में प्रियंक खड़गे ने कहा था कि इतने बड़े स्तर पर काम करने वाले संगठन को अपने कानूनी दर्जे, पंजीकरण, पदाधिकारियों, फंडिंग, खर्च, कर भुगतान और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति जैसी जानकारियां सार्वजनिक करनी चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि जब आम नागरिकों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO), ट्रस्टों, मंदिरों, श्रमिक संगठनों और कंपनियों को कानून के तहत पंजीकरण और नियमों का पालन करना पड़ता है, तो RSS इससे अलग क्यों रहे?

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