X के नए सेंसरशिप फीचर पर भारत सख्त, सरकार बोली- पारदर्शिता ठीक लेकिन देश का कानून मानना होगा

नई दिल्ली
 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) के मालिक एलन मस्क और भारत सरकार के बीच एक बार फिर ठन गई है. भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि एलन मस्क की कंपनी को भारत के कानूनों (Law of the Land) का पूरी तरह पालन करना होगा। 

क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एलन मस्क ने X पर एक नया ओपन-सोर्स एल्गोरिदम पेश करने की घोषणा की. मस्क का दावा है कि इस नए फीचर के जरिए सरकारों द्वारा की जाने वाली सेंसरशिप पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी. नए नियम के तहत, यदि दुनिया की कोई भी सरकार या सरकारी एजेंसी X से किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट को ब्लॉक करने का अनुरोध करती है, तो X उस आदेश और उसके कानूनी आधार को यूजर्स के सामने सार्वजनिक कर देगा। 

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सरकार की आपत्ति और कानूनी अड़चन
मस्क के इस कदम पर भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है. नई दिल्ली में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अधिकारी ने स्पष्ट किया, "X को भारत के नियमों और कानूनों के दायरे में ही काम करना होगा। 

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दरअसल, भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून की धारा 69A के तहत सरकार को देश की संप्रभुता, अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने वाले कंटेंट को ब्लॉक करने का अधिकार है. सुरक्षा कारणों से इन सरकारी आदेशों और प्रक्रियाओं को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है. X का नया पारदर्शिता नियम सीधे तौर पर भारत के इन गोपनीयता कानूनों का उल्लंघन करता है। 

आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि X भारतीय कानूनों की अनदेखी कर सरकारी आदेशों को सार्वजनिक करता है, तो सरकार उसके खिलाफ सख्त रुख अपना सकती है. ऐसी स्थिति में X को भारत में मिलने वाला 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) का दर्जा छीना जा सकता है. यह दर्जा हटने के बाद, X एक सुरक्षित माध्यम नहीं रहेगा और उसके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाली किसी भी आपत्तिजनक या अवैध सामग्री के लिए सीधे कंपनी और उसके अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे चलाए जा सकेंगे। 

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