राजस्थान में खाद वितरण पर बड़ा प्रस्ताव, यूरिया-डीएपी की खरीद की सीमा तय करने की तैयारी

जयपुर
 यूरिया और डीएपी की उपलब्धता व वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कृषि आयुक्तालय राजस्थान ने उर्वरक बिक्री की सीमा तय करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। कृषि आयुक्तालय राजस्थान जयपुर की ओर से 25 अगस्त को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजे पत्र में उर्वरक बिक्री का एक फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया गया है।

प्रस्ताव के अनुसार यूरिया के लिए प्रति हेक्टेयर 5 बैग व प्रति एकड़ 2 बैग की सीमा सुझाई गई है। वहीं, डीएपी के लिए प्रति हेक्टेयर 3 बैग प्रति फसल सीजन की सीमा प्रस्तावित है। प्रस्ताव लागू होने पर किसानों को निर्धारित मात्रा के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।

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जमाखोरी पर रोक और समान वितरण पर जोर
प्रस्ताव का उद्देश्य किसानों के बीच उर्वरकों का समान वितरण करना और एक ही किसान की ओर से अधिक मात्रा में खरीद पर रोक लगाना है। जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर किसानों को लंबी कतारों में लगकर खाद लेना पड़ता है।

वहीं, कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंकाएं भी सामने आती रही हैं । अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव मंजूर होने पर आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ कालाबाजारी और कृत्रिम कमी पर नियंत्रण में भी मदद मिलने की उम्मीद है ।

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रबी सीजन में बढ़ेगी खाद की मांग
खरीफ फसल की कटाई के बाद रबी की बुवाई के दौरान किसानों को पहले डीएपी और इसके बाद यूरिया की मांग बढ़ने की संभावना है। बस्सी, चाकसू, सांगानेर और जमवारामगढ़ क्षेत्रों में खेती का बड़ा दायरा है। रबी सीजन में इन क्षेत्रों में दोनों उर्वरकों की मांग बढ़ती है।

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मांग और आपूर्ति में असंतुलन के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रस्ताव लागू होने पर उर्वरक वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है।

इनका कहना है
उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिए यह प्रस्ताव भेजा गया है। इससे किसानों को समय पर और उचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। अब निर्णय केंद्र सरकार पर निर्भर है।
    विनोद कुमार रेगेरा, संयुक्त निदेशक कृषि (इनपुट)

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