नई दिल्ली
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण और नियामक निगरानी को बढ़ाने के लिए अक्टूबर से चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने जा रही है।इस फैसले से चांदी के आभूषण अनिवार्य स्वर्ण हॉलमार्किंग को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे के करीब आ गए हैं। बीआईएस ने सबसे पहले 2000 में सोने के लिए एक स्वैच्छिक हॉलमार्किंग योजना शुरू की थी, जिसे सरकार ने जून 2021 में कम से कम एक मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्र (एएचसी) वाले 256 जिलों में अनिवार्य कर दिया था। छह चरणों में लागू की गई अनिवार्य स्वर्ण हॉलमार्किंग अब भारत के 782 जिलों में से लगभग 400 जिलों तक विस्तारित हो चुकी है। चांदी की हॉलमार्किंग भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
यह कदम सरकार द्वारा चांदी की वस्तुओं के लिए परीक्षण और प्रमाणीकरण बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ छह अंकों की विशिष्ट पहचान (एचयूआईडी) प्रणाली की शुरुआत के बाद उठाया गया है।
भारतीय मानक ब्यूरो ( बीआईएस ) वर्तमान में 102 जिलों में फैले 341 चांदी परख और हॉलमार्किंग केंद्रों का संचालन करता है, जिसके अंतर्गत 25,000 चांदी के आभूषण विक्रेता पंजीकृत हैं। बीआईएस चांदी के आभूषणों के लिए शुद्धता के सात ग्रेड मान्यता देता है, जो 800 से 999 भाग प्रति हजार तक होते हैं।

चांदी की हॉलमार्किंग पर सरकार की मंशा
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के महानिदेशक संजय गर्ग के मुताबिक, चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग की मांग खुद उद्योग की ओर से आ रही है. हालांकि, इसे लागू करने से पहले BIS नियामकीय ढांचे और जरूरी बुनियादी ढांचे का आकलन कर रहा है. इसमें टेस्टिंग क्षमता, असेइंग मानक और लैब नेटवर्क की उपलब्धता जैसे पहलू शामिल हैं. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि व्यवस्था लागू होने पर उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को परेशानी न हो।
HUID सिस्टम से मिल रही पारदर्शिता
फिलहाल चांदी की हॉलमार्किंग भले ही स्वैच्छिक हो, लेकिन अगर कोई ज्वेलर अपने उत्पाद पर हॉलमार्क लगाता है तो उस पर हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर देना अनिवार्य है. यह छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिससे ग्राहक BIS के डेटाबेस में जाकर चांदी की शुद्धता और ट्रेसेबिलिटी जांच सकता है. सितंबर 2025 से HUID का नियम लागू होने के बाद चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।
बढ़ती कीमतें और बढ़ता भरोसा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चांदी की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग 2024 में 31 लाख आर्टिकल से बढ़कर 2025 में 51 लाख तक पहुंच गई है. अब तक 20 लाख से ज्यादा चांदी के आर्टिकल HUID नंबर के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि चांदी की कीमतों में हालिया उछाल और निवेशकों की बढ़ती रुचि के चलते शुद्धता और मानकीकरण का मुद्दा ज्यादा अहम हो गया है. इसी वजह से सरकार सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग के अनुभव से सीख लेकर चांदी के लिए रणनीति बना रही है।
भारत में चांदी की खपत और आगे की राह
भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में शामिल है. देश में सालाना चांदी की मांग करीब 5,000 से 7,000 टन के बीच आंकी जाती है, जबकि घरेलू उत्पादन इसका छोटा हिस्सा ही पूरा कर पाता है. आभूषण और चांदी के बर्तन इस खपत का बड़ा भाग हैं, साथ ही औद्योगिक इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है. फिलहाल सरकार ने चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि उद्योग से व्यापक सलाह-मशविरा और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
भारत में अक्टूबर 2005 से स्वैच्छिक आधार पर चांदी की हॉलमार्किंग उपलब्ध है, जिससे बीआईएस-पंजीकृत जौहरी मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्रों पर अपने गहनों को प्रमाणित करवा सकते हैं।
हालांकि, सितंबर 2025 से, हॉलमार्किंग से गुजरने वाली किसी भी चांदी की वस्तु पर बीआईएस द्वारा जारी छह अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक एचयूआईडी होना अनिवार्य है। इस पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन से पहले उद्योग की तैयारियों का आकलन करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को एचयूआईडी पोर्टल लॉन्च होने के बाद से अब तक 77 लाख से अधिक चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्किंग हो चुकी है।
इस प्रणाली के तहत, प्रत्येक हॉलमार्क वाली वस्तु पर बीआईएस मानक चिह्न, 'सिल्वर' शब्द, उसकी शुद्धता श्रेणी और उसका विशिष्ट एचयूआईडी प्रदर्शित होना अनिवार्य है, जिससे उपभोक्ता बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से उत्पाद के विवरण को डिजिटल रूप से ट्रैक और सत्यापित कर सकें।
