मशरूम की खेती से हर महीने ₹50 हजार कमाने का मौका, कम जगह और लागत में शुरू करें बिजनेस

लखनऊ
भरपूर पोषक तत्वों के लिए शुमार मशरूम की बाजार में मांग अधिकतर हर सीजन में बनी रहती है। अपने गुण और स्वाद के कारण मशरूम अन्य सब्जियों की तुलना में अधिक लोकप्रिय बना हुआ है। ऐसे में बाजार में बढ़ती मांग के बीच किसान भाई मशरूम उत्पादन से अच्छी कमाई कर सकते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि मशरूम की खेती कैसे शुरू कर सकते हैं?

मशरूम की बढ़ती मांग किसानों के लिए सोने की खेती साबित हो सकती है, क्योंकि कम लागत और कम जगह में इस व्यवसाय से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। यही नहीं इसमें सिर्फ एक बार ही मेहनत करनी होती है, जिसके बाद पारंपरिक खेती की तरह जीतोड़ मेहनत की आवश्यकता भी नहीं होती है।

उत्तर प्रदेश में सरकार भी मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहित करती है, जिसके लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मशरूम उत्पादन के लिए कंपोस्ट तैयार करने की विधियों पर जानकारी दी जाती है।

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इसके अलावा, कंपोस्ट की सामग्री, उसकी तैयारी, आवश्यक परिस्थितियों और गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीकी जानकारी के साथ प्रायोगिक कार्य भी कराया जाता है। आप अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर 'मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण' की पूरी जानकारी ले सकते हैं।

कितनी आएगी लागत, कितनी कमाई
एक अनुमान के अनुसार, दस फीट लंबाई और दस फीट चौड़ाई वाले कमरे मशरूम के दो सौ से ढाई सौ बैग लगाए जाएं तो हर महीने तकरीबन पचास हजार रुपये तक की कमाई की जा सकती है। मशरूम को धूप की जरूरत नहीं होती, इसे पूरी तरह अंधेरे और ठंडे कमरे या शेड में उगाया जाता है।

मशरूम उत्पादन शुरू करने में 10 से 50 हजार रुपये का शुरूआती निवेश लग सकता है। एक बैग तैयार करने में डेढ़ सौ रुपये की लागत आती है। मशरूम की कई प्रजातियां भी हैं, जैसे- मिल्की, ओयस्टर, बटन, ढींगरी, पोटबेलो और कीड़ा-जड़ी इत्यादि। बाजार में इन सबकी कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक मिलती है।

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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवनीत कुमार मिश्र ने बताया कि मशरूम उत्पादन रोजगार सृजन के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है। कम भूमि और सीमित संसाधनों में भी इसे शुरू किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बेरोजगारी कम होगी।

सावधानियां-
मशरूम की खेती में सबसे बड़ा रिस्क संक्रमण का होता है, जिससे मशरूम बैग को बचाना अतिआवश्यक होता है। जरा सी भी लापरवाही से कमरे में बैक्टीरिया, वायरस या जंगली फंगस पनप सकते हैं, जिससे पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। इसके लिए कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है-

    कमरे को हमेशा साफ रखें। खिड़की पर जाली लगी हो ताकि धूल मिट्‌टी से बचाव हो सके।
    कमरे में प्रवेश करने से पहले खुद को साफ रखें। हाथ-पैर को अच्छे से साफ करके ही अंदर आएं। संभव हो तो मास्क का प्रयोग करें।
    बीज खरीदते समय गुणवत्ता का ध्यान रखें। हमेशा सरकारी लैब, कृषि विश्वविद्यालय या विश्वसनीय विक्रेता से ही ताजे बीज खरीदें।
    कमरे में झाड़ू न लगाएं, इससे उड़ने वाली धूल में मौजूद बैक्टीरिया फसल खराब कर सकते हैं। हमेशा पोछा लगाकर ही सफाई करें।

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मशरूम लेडी पूजा कमा रही लाखों रुपये
मशरूम उत्पादन में इन हाउस फार्मिंग की कैटेगरी में आता है, जिससे यह घरेलू महिलाओं के स्वरोजगार का भी बेहतर विकल्प है। इसकी मिसाल पेश करती हैं सहारनपुर की पूजा सैनी जो अपने पति के साथ मिलकर घर में ही मशरूम उत्पादन करती हैं और उनकी सालाना कमाई 20 लाख रुपये तक हो जाती है।

पूजा बताती हैं कि 2018 में उन्होंने मशरूम की खेती शुरू की। उन्होंने पति के साथ कृषि विज्ञान केंद्र से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। घर पर ही प्रयोग के तौर पर दो बैग तैयार किए और धीरे-धीरे बैगों की संख्या बढ़ती गई और आज यह संख्या हजारों में पहुंच चुकी है।

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