रामसर के सीमावर्ती गांवों में मतीरे की बंपर पैदावार, किसानों को मिल रहा सहारा

रामसर
 सीमावर्ती क्षेत्र की रेतीली धरा पर इन दिनों मतीरों की बहार आई हुई है। खेतों में फैली मतीरे की बेलों और तैयार फसल के बीच किसान परिवार उपज को समेटने में जुटे हैं। पश्चिमी राजस्थान की पारंपरिक खेती में शामिल मतीरे की पैदावार किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया बन रही है। वहीं, मतीरे के बीज की अच्छी कीमत मिलने से किसानों को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है।

रामसर के गागरिया, बुठिया , जुम्मे फकीर की बस्ती, चाड़वा सहित कई सरहदी गांवों में मतीरे की खेती ग्रामीण जीवन और स्थानीय कृषि व्यवस्था का अहम हिस्सा है। कम पानी वाले रेतीले इलाकों में उगने वाली यह फसल किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देती है। खेतों में तैयार मतीरों को एकत्र करने, काटने और बीज निकालने के काम में परिवार के सदस्य जुटे नजर आ रहे हैं।

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मतीरा बीज कीमतों में बढ़ोत्तरी
मतीरे की खेती में किसानों के लिए बीज की कीमत खास मायने रखती है। जानकारी के अनुसार, मतीरे का बीज करीब 20 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। ऐसे में बेहतर उत्पादन और उचित बाजार भाव मिलने पर किसानों की आमदनी में इजाफा हो सकता है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा उत्पादन, श्रम, परिवहन और बाजार में मिलने वाले भाव पर निर्भर करेगा।

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परंपरागत खेती से आजीविका को सहारा
सीमावर्ती क्षेत्र में खेती केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी है। मतीरे की अच्छी पैदावार किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। यदि किसानों को उपज का उचित मूल्य और बाजार तक बेहतर पहुंच मिले, तो मतीरे की खेती उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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क्षेत्र में बारिश की कमी रही हैं। जिससे बाजरे का उत्पादन कम होने की संभावना है। लेकिन कुछ खेतों में मतीरे के पैदावार होने से किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी।
    पंकज कुमार,कृषि पर्यवेक्षक

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