भोपाल के जंगलों से गुजरेंगी 60 मीटर चौड़ी सड़कें, बाघों के मूवमेंट पर मंडराया खतरा

भोपाल
  मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में शहरी योजनाकारों की अलग ही प्लानिंग नजर आ रही है। शहर से लगे सघन वन क्षेत्रों और वन्यजीवों के कोर प्रजनन जोन से भारी-भरकम सडकें प्रस्तावित कर दी गई है। जहां कोई आबादी नहीं है, आवाजाही नहीं है वहां 18 मीटर से 30 मीटर व 60 मीटर तक चौड़ाई की सडकें तय कर दी है। वन्यप्राणी एक्सपर्ट प्रभाष जेठली ने बकायदा पूरी रिपोर्ट बनाई। शहर के वन व वन्यप्राणी कॉरीडोर को लेकर किए गए तकनीकी ऑडिट में खुलासा हुआ है कि यह गड़बड़ी भोपाल की वैश्विक पहचान बन चुके अर्बन टाइगर्स के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है।

प्लानिंग की मुख्य खामियां
अकबरपुर से चंदनपुरा-मिंडोरी 60 मीटर चौड़ी सड़क की टोपोग्राफी बेहद कठिन, पहाड़ी और दुर्गम है। हाईवे इंजीनियरिंग के जानकारों के अनुसार यहां इतनी चौड़ी सड़क का निर्माण असंभव है। इसके बावजूद इसे उस क्षेत्र से निकाला गया है, जहां मानव प्रवेश वर्जित है और यह अर्बन टाइगर का मुख्य प्रजनन व शावक पालन क्षेत्र है। असल में समरधा, केरवा, कलियासोत, चंदनपुरा और मिंडोरी का यह सघन वन क्षेत्र रातापानी टाइगर रिजर्व के लैंडस्केप का महत्वपूर्ण विस्तार है। इसलिए बिना किसी शहरी आवश्यकता के जंगलों में सड़क बनाना ठीक नहीं है।

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-चीचली से चंदनपुरा 24 मीटर चौड़ी सड़क को अछूते वन क्षेत्र के बीचों-बीच बिना किसी शहरी रोड से जोड़े प्रस्तावित किया गया है। यह सड़क बाघों के भ्रमण मार्ग को दो हिस्सों में बांट देगी, जिससे मानव-बाघ संघर्ष की आशंका तय है।

-बैरागढ़ चीचली से केरवा घाट होते हुए मिंडोरा तक 45 मीटर चौड़ी सड़क तय कर दी। इसके एक तरफ संरक्षित वन की पहाड़ी का ढलान है और दूसरी तरफ केरवा बांध का गहरा पानी है। यहां चौड़ीकरण करना तकनीकी रूप से नामुमकिन है, साथ ही यह वन्यजीवों के पेयजल स्रोत को बाधित करेगा और जन-सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।

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री-डेंसीफिकेशन का नहीं देखा प्रजेंटेशन
वहीं दूसरी ओर सीएस की साधिकार समिति की बैठक में शिवाजी नगर, तुलसी नगर से लेकर 94 बंगला, चार इमली का री-डेंसीफिकेशन प्रस्ताव का सोमवार प्रजेंटेशन नहीं हो पाया। हालांकि इसे होल्ड या रद्द भी नहीं किया है। समिति के सामने हाउसिंग बोर्ड के अफसरों ने जिले के चार प्रोजेक्ट रखे थे। इसमें सतपुड़ा-विंध्याचल भवन को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित करने, प्रोफेसर कॉलोनी री-डेंसीफिकेशन प्रोजेक्ट को नए सिरे से तय करना, मौजूदा जगह पर तय कलेक्ट्रेट प्रोजेक्ट के लिए एजेंसी तय करना और शिवाजी नगर से 74 बंगला, चार इमली, तुलसी नगर तक 500 एकड़ में री-डॅसीफिकेशन प्रोजेक्ट करना। यहां कई अन्य प्रोजेक्ट भी थे।

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काफी भीड़ बढ़ने से बाद में सिर्फ प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट कंसलटेंट को बुलाकर प्रजेंटेशन लिया गया। बोर्ड अफसरों के अनुसार कलेक्ट्रेट के प्रोजेक्ट के लिए एजेंसी तय कर दी है। इस माह के आखिर तक जमीनी काम शुरू हो जाएगा। शिवाजी नगर, तुलसी नगर प्रोजेक्ट को लेकर सीएस ने प्रजेंटेशन बाद में लेने की बात कही। उन्होंने इस पर जनता का आक्रोश ज्यादा होने का भी कहा। अभी इसकी एजेंसी समेत अन्य कागजी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएगी, तो बाद में इसपर अलग से बैठक लेंगे।

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