इजराइल में सरकार गठन पर संकट, नए चुनाव टालने के लिए राष्ट्रपति हर्जोग ने की सभी दलों से अपील

 यरूशलम
इजराइल में हाल ही में हुए आम चुनावों के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है।
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग (Isaac Herzog) ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे नए चुनाव में जाने से बचने के लिए खुले दिमाग से आएं और गठबंधन सरकार बनाने के प्रयास करें। राष्ट्रपति ने नई सरकार बनाने के लिए 'नए और रचनात्मक विचारों' का आह्वान किया है।
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग का कहना है कि उन्हें बुधवार को चुनाव के आधिकारिक नतीजे मिल जाएंगे, जिसके बाद वे सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के साथ बातचीत शुरू करेंगे।

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हर्जोग ने कहा, "मैं सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील करता हूं कि वे नए और रचनात्मक विचारों और समाधानों के लिए तैयार रहें, ताकि देश को फिर से चुनाव की स्थिति में जाने से बचाया जा सके।" उन्होंने आगे कहा, "चुनाव के नतीजे अब एक सच्चाई हैं; सभी नेताओं को अपने कट्टर रुख को एक तरफ रखकर इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि "फिर से चुनाव कराने की नौबत न आए", इसके लिए सभी राजनीतिक विकल्पों पर विचार किया जाएगा। सरकार बनाने के लिए चुने गए विजेता के पास 42 दिनों तक का समय होगा।

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जॉइंट लिस्ट- रा'अम किंगमेकर
इस मतदान के चलते, इजराइल के फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो मुख्य चुनावी समूहों – 'यूनाइटेड अरब लिस्ट' (रा'अम) और 'जॉइंट लिस्ट' – को 120 सदस्यीय संसद में कुल 19 सीटें मिली हैं। इससे वे अगली सरकार बनाने के मामले में एक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, इस व्यापक समर्थन को स्वीकार करने के बजाय, इजराइल के प्रमुख राजनेताओं ने या तो उनके वोटों को अवैध ठहराने की कोशिश की है (इसे विदेशी हस्तक्षेप का नाम देकर), या फिर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले फिलिस्तीनियों के इस कदम को "चुनाव चुराने की कोशिश" के रूप में पेश किया है।

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राष्ट्रपति ने किया आह्वान
27 अक्टूबर 2026 को हुए इजरायली संसद (नेसेट) के चुनावों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन किसी भी पक्ष (नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गुट या विपक्षी गुट) को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने का संकल्प लिया है, जबकि अरब पार्टियों के मजबूत प्रदर्शन और विपक्षी नेता गदी आईसेनकोट के रुख के कारण गठबंधन बनाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। नेतन्याहू इस दौरान कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने हुए हैं।

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