ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर भक्ति का उमड़ा सैलाब, मोहन यादव ने किया शंकराचार्य प्रकटोत्सव का शुभारंभ

ओंकारेश्वर 

देश में एकात्म धाम के रूप में विकसित आचार्य शंकराचार्य की तीर्थस्थली ओंकारेश्वर में आज शुक्रवार से एकात्मक पर्व का शुभारंभ किया गया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित एकात्म धाम पहुंचकर 5 दिवसीय प्रकटोत्सव का शुभारंभ किया. इस अवसर पर उनके साथ जगतगुरु शंकराचार्य सदानंद सरस्वती के अलावा स्वामी शारदानंद सरस्वती एवं सुश्री निवेदिता भिड़े आदि मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के शुभारंभ में पंचांग पूजन और यज्ञ वेदी के पूजन के साथ प्रकटोत्सव का शुभारंभ किया। 

ओडिसी नृत्य की होगी प्रस्तुति
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में अद्वैत वेदांत की समकालीन परंपराओं पर विस्तृत चर्चा की गई. साथ ही अद्वैत एवं Gen-Z जैसे महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हो रही है. इस दौरान स्वामी ब्रह्मा प्रज्ञानंद सरस्वती शतावधानी ललित द्वितीय एवं विशाल चौरसिया जैसे मर्मज्ञ अद्वैत की व्याख्या करेंगे. इस दौरान जय तीर्थ मेवुडी का शास्त्री गायन और सुवधावराड़ कर के ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति भी होगी। 

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यह प्रतिमा स्वामी शंकराचार्य के 12 वर्षीय बाल रूप को दर्शाती है, जिसका अनावरण 21 सितंबर 2023 को हुआ था. इसके बाद यहां एक विशाल संग्रहालय जो शंकराचार्य के जीवन दर्शन और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रदर्शित करता है विकसित किया गया है. यहां अद्वैत वेदांत के अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक वैश्विक केंद्र भी स्थापित किया गया है. बता दें कि, मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में मई 2025 में आयोजित कैबिनेट में 'अद्वैत लोक' संग्रहालय के निर्माण के लिए 2,195 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। 

जागरण का सुंदर संगम
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा-आद्य गुरु शंकराचार्य की पावन स्मृति और अद्वैत वेदांत के सार्वभौमिक संदेश को आम जन तक पहुंचाने के लिए एकात्म धाम, ओंकारेश्वर में आयोजित आचार्य शंकर प्रकटोत्सव  एकात्म पर्व में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह उत्सव भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और एकात्म भाव के जागरण का सुंदर संगम है। अद्वैत का संदेश हमें याद दिलाता है कि पूरी सृष्टि एक ही चेतना से भरी हुई है। 

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अद्वैत दर्शन को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल
‘एकात्म पर्व’ के माध्यम से अद्वैत वेदांत के गूढ़ सिद्धांतों को सरल और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। खासतौर पर युवाओं को भारतीय दर्शन से जोड़ने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ सकें।

आधुनिकता और अध्यात्म का संगम
महोत्सव में अद्वैत दर्शन को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर चर्चा से यह आयोजन नई सोच और आध्यात्मिकता का अनूठा मेल प्रस्तुत कर रहा है।

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 समापन में युवा शक्ति का सम्मान
कार्यक्रम के अंतिम दिन नर्मदा तट पर दीक्षा समारोह आयोजित होगा, जिसमें सैकड़ों युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में जुड़ेंगे। साथ ही अद्वैत दर्शन के प्रचार में योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाएगा।

मांधाता पर्वत पर शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची मूर्ति
एकात्म धाम मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर मांधाता पर्वत पर स्थित एक भव्य आध्यात्मिक केंद्र है, जो अद्वैत वेदांत के दार्शनिक आदि गुरु शंकराचार्य को समर्पित है. यहां आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची स्टैचू ऑफ वननेस स्थापित की गई है. जो अद्वैत लोक संग्रहालय और अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद वेद संस्थान परिसर में स्थित है। 

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