ड्रग कानून प्रवर्तन के लिए भोपाल में चौथा राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

भोपाल

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) के तत्वावधान में आज केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (CAPT), भोपाल में ड्रग कानून प्रवर्तन के लिए चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के पूर्व डीजीपी और सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

उद्घाटन भाषण में शुक्ला ने नार्को समन्वय केंद्र (NCORD) कार्यक्रम के तहत आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल युग में ड्रग तस्करी द्वारा उत्पन्न बहुआयामी चुनौतियों का सामना करने के लिए कानून प्रवर्तन, नियामक निकायों और संबंधित संगठनों के प्रमुख हितधारकों को एकजुट करने में इस विशेष सम्मेलन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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अकादमी के निदेशक अनिल किशोर यादव, (आईपीएस) ने सम्मेलन की थीम, “डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और मनी लॉन्ड्रिंग: ड्रग तस्करी की चुनौतियों का त्रिकोण और व्यापक रोकथाम और पुनर्वास की आवश्यकता” के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे ये डिजिटल चुनौतियाँ ड्रग तस्करी की जटिलता को बढ़ाती हैं। उन्होंने ड्रग तस्करी की रोकथाम, पुनर्वास और प्रवर्तन के लिए सहयोगी एवं कार्रवाई योग्य रणनीतियों के महत्व पर जोर दिया।

सम्मेलन सचिव बीके शर्मा, एसपी/सहायक निदेशक ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और सम्मेलन में विविध प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में बीएसएफ, तटरक्षक बल, सीआईएसएफ, एसएसबी, एनसीबी, असम राइफल्स, आरपीएफ, सीबीआई, एनआईए, आईबी, एसपीजी, डीआरआई, एनएसीआईएन, ईडी और एफआईयू जैसे प्रमुख संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये। साथ ही राज्य एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) भी सम्मेलन में प्रतिभागी के रूप में शामिल हुई। अन्य प्रमुख प्रतिभागियों में भारत के नारकोटिक्स आयुक्त, यूएनओडीसी, अग्रणी गैर सरकारी संगठन और संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि भी यहां मौजूद रहें।

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सम्मेलन में विशेषज्ञ प्रस्तुतियाँ और संवादात्मक चर्चाएं होंगी, जो नशीली दवाओं की तस्करी में डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और मनी लॉन्ड्रिंग के उपयोग जैसी उभरती चुनौतियों पर केंद्रित होंगी। सत्रों का उद्देश्य मजबूत इन्टर एजेंसी सहयोग को बढ़ावा देना और समग्र दृष्टिकोण विकसित करना है, जो प्रवर्तन को पुनर्वास और रोकथाम के साथ एकीकृत करता है।

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यह सम्मेलन नशीली दवाओं की तस्करी और इसके सामाजिक प्रभाव से निपटने के लिए एक व्यापक और एकीकृत रणनीति को बढ़ावा देते हुए नशीली दवाओं के कानून प्रवर्तन में उभरती चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया है।

 

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