मध्य प्रदेश में विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ सकते हैं, विधानसभा की कार्यवाही होगी डिजिटल

भोपाल 
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार अब प्रशासनिक कामकाज के बाद विधायी कामकाज को भी पूरी तरह हाई-टेक बनाने जा रही है।  विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश विधानसभा को 'डिजिटल' करने और विधायकों की सुख-सुविधाओं को लेकर बड़े फैसले लिए गए हैं।

बजट सत्र से लागू होगा 'ई-विधान'
सरकार ने निर्णय लिया है कि आगामी बजट सत्र से विधानसभा में 'ई-विधान' प्रणाली लागू कर दी जाएगी। जिस तरह कैबिनेट बैठकों में अब कागज की जगह टैबलेट का उपयोग हो रहा है, उसी तरह अब विधानसभा की कार्यवाही भी पेपरलेस होगी। हालांकि, इसे पिछले सत्रों में ही लागू किया जाना था, लेकिन तकनीकी तैयारियों के चलते अब इसे फरवरी में होने वाले बजट सत्र से अनिवार्य रूप से शुरू करने की योजना है।

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विधायकों के वेतन-भत्ते और आवास पर चर्चा
बैठक में विधायकों के वेतन और भत्तों में वृद्धि को लेकर भी गंभीर मंथन हुआ। वेतन वृद्धि के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। लंबे समय से विधायक अपना भत्ता बढ़ाने का दबाव बना रहे थे, जिस पर अब सरकार बजट सत्र के दौरान अंतिम मुहर लगा सकती है। इसके साथ ही, विधायक विश्राम गृह (रेस्ट हाउस) परिसर में विधायकों के लिए बन रहे नए लग्जरी आवासों के निर्माण और वहां आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति बनी है।

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बैठक में मुख्यमंत्री के साथ संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लंबे समय ई-विधानसभा की मांग चल रही है। इसके लिए विधायकों को टैब भी दिए जाने की योजना है।

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