यासीन मछली को हाईकोर्ट से झटका, विधानसभा में फर्जी प्रवेश पास मामले में जमानत अर्जी हुई निरस्त

भोपाल /जबलपुर

 भोपाल के गैंगस्टर यासीन अहमद मछली को फर्जी विधानसभा एंट्री पास मामले में हाईकोर्ट से झटका लगा है. उच्च न्यायालय ने अपराध की गंभीरता तथा अपीलकर्ता के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसे जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया है. हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ये फैसला सुनाया.

भोपाल के गैंगस्टर यासीम अहमद मछली की तरफ से निजी वाहन में फर्जी विधानसभा एंट्री पास का उपयोग किये जाने के मामले में अरेरा थाने में धारा 318(4), 319(2), 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमें में जमानत के लिए आवेदन किया था. अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि क्राइम ब्रांच ने उसे 23 जुलाई 2025 को एक अन्य अपराध में हिरासत में लिया था. इस अपराध में वह 1 अगस्त 2025 से अभिरक्षा में है.

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दरअसल भोपाल पुलिस की गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने जमानत याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। आरोपी मछली विधानसभा का फर्जी पत्रकार पार्किंग पास निजी वाहन में इस्तेमाल करता था, जिस पर भोपाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि यह मामला सीधे विधानसभा की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

भोपाल के अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 131/2025 से संबंधित है। अभियोजन के मुताबिक, 25 जुलाई 2025 को प्राप्त शिकायत के बाद जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2024 के विधानसभा सत्र के लिए पत्रकार गौरव शर्मा के नाम से जारी पार्किंग पास क्रमांक 433 को आरोपी यासीन अहमद उर्फ मछली ने कथित रूप से छेड़छाड़ कर अपनी निजी कार (एमपी 04 जेड एल 0999) में लगा लिया। जबकि यह पास किसी अन्य वाहन के लिए वैध रूप से जारी किया गया था।

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अपीलकर्ता ने कहा, विधानसभा में एंट्री के लिए नहीं किया इस पास का इस्तेमाल

शिकायतकर्ता के अनुसार अगस्त 2024 तक उसने अपनी गाड़ी पर इस पास का इस्तेमाल किया था. अपीलकर्ता ने विधानसभा में एंट्री के लिए इस पास का इस्तेमाल नहीं किया है. अपीलकर्ता का अपराधिक रिकॉर्ड है परंतु वह अधिकांश मामलों में दोषमुक्त हो गया है.

शासन की तरफ से जमानत अर्जी का विरोध करते हुए बताया गया कि विधानसभा ऑफिस ने ब्रेकिंग न्यूज के एडिटर गौरव शर्मा के वाहन नंबर एमपी-04-टीबी-3950 लिए “जर्नलिस्ट” विधानसभा पार्किंग पास नंबर 433 जारी किया था. अपीलकर्ता फर्जी पास का उपयोग अपने वाहन क्रमांक एमपी 04-डेजएल 0999 में कर रहा था. आवेदक एक क्रिमिनल हिस्ट्रीशीटर है और वह पास वाली गाड़ी का इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों के लिए कर रहा था.

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कोर्ट ने कहा, जुर्म की गंभीरता और आवेदक के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए नहीं दी जा सकती जमानत

आवेदक ने जाली पास बनाकर अपनी गाड़ी पर लगाया है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ विधानसभा में एंट्री के लिए किया जाता था. यह विधानसभा के विधायकों और मंत्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा था. एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जुर्म की गंभीरता और आवेदक के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है. शासन की तरफ से अधिवक्ता सीएम तिवारी ने पैरवी की.

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