जाति गणना पर सस्पेंस खत्म? मंत्री का बड़ा बयान—सवालों की टाइमलाइन संसद में आई सामने

नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के तहत जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। जनगणना के साथ-साथ जाति गणना कराने के अपने इरादे को जताते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत में जनगणना की प्रक्रिया परंपरागत रूप से दो चरणों में पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि जनगणना के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO)का काम संपन्न होगा। इसके तहत इस चरण में हर घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति, सुविधाएं और बुनियादी ढांचा जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।।

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राय ने बताया कि सरकार ने मतगणना के इस चरण से जुड़े प्रश्नों को 22 जनवरी 2026 को अधिसूचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस चरण के बाद दूसरा चरण- जनसंख्या गणना (Population Enumeration – PE) का होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी चरण में जाति की गणना भी की जाएगी।

जाति गणना पर राज्यों की मांग
गृह राज्य मंत्री ने बताया कि जाति गणना को लेकर कई राज्यों और संगठनों से सुझाव और मांगें मिली हैं, जिनमें तमिलनाडु राज्य की ओर से भेजे गए अभ्यावेदन भी शामिल हैं। उन्होंने उन मांगों और जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए कहा कि दूसरे चरण के लिए प्रश्नावली, जिसमें जाति से जुड़े प्रश्न भी शामिल होंगे, जनगणना शुरू होने से पहले तय कर अधिसूचित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और स्थापित प्रक्रिया के तहत होगी।

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क्या है खास बात?
दरअसल, लंबे समय से जाति आधारित जनगणना को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है क्योंकि जाति जनगणना को लेकर नीति और तकनीकी मैकेनिज़्म अभी तक अंतिम रूप में सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों और न्यायालय ने भी कहा है कि डेटा की सत्यता और भरोसेमंद रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जांच-प्रक्रियाएँ बनानी होंगी। बहरहाल, जनगणना 2027 में जाति को शामिल करने की पुष्टि को एक अहम नीतिगत कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक नीतियों को दिशा मिल सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि दूसरे चरण की प्रश्नावली में जाति से जुड़े सवाल किस स्वरूप में रखे जाते हैं।

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2027 की जनगणना 16वें राष्ट्रीय सर्वेक्षण के रूप में होगी। हिमालयी और बर्फ़ीले इलाकों में पहले चरण की गिनती 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी, जबकि बाकी देश में मुख्य गणना 1 मार्च 2027 से रेफरेंस डाटा के साथ शुरू होगी। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जाएगी, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए लोगों को अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा।

 

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