बुरहानपुर के केले को मिला GI टैग, अब ग्लोबल ब्रांड बनेगी जिले की पहचान

बुरहानपुर   बुरहानपुर का केला पूरे देश के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर है. अब बुरहानपुर में उत्पादित केले को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है. हाल ही में बुरहापुर के केले को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानि जीआई टैग मिला है. इससे केला उत्पादक किसानों में खुशी की लहर है. बीते 15 सालों से बुरहानपुर के केले को जीआई टैग दिलाने की कोशिशें चल रही थीं।  सालाना औसतन 18 लाख मैट्रिक टन उत्पादन बुरहानपुर जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर रकबे में केला फसल लगाई जाती है. 18 हजार 640…

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खुशियों की दास्ताँ :केले के रेशों से बुना सपनों का ताना-बाना

बुरहानपुर मध्यप्रदेश का बुरहानपुर केले की खेती के लिए प्रसिद्ध है, अब अपने नवाचारों के लिए भी जाना जा रहा है। यहां की महिलाओं ने अपने हुनर से न केवल अपने जीवन को संवारा, बल्कि जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। इन महिलाओं में से एक हैं एकझिरा गांव की अनुसुईया चौहान, जिन्होंने केले के तने के रेशे से टोपी बनाकर लंदन तक अपनी पहचान बनाई है। बुरहानपुर में आयोजित बनाना फेस्टिवल ने अनुसुईया दीदी को नई ऊर्जा और प्रेरणा दी। आजीविका मिशन ने दी नई दिशा…

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केले की प्राकृतिक खेती ने बदल दी कृषक पूरनलाल की तकदीर

भोपाल नया दौर, नया दौर की नई बात। परम्परागत खेती अब गुजरे वक्त की बात हो गई है। अब दौर प्राकृतिक और उन्नत खेती का है। प्राकृतिक खेती से होने वाली उपज की आजकल भारी मांग है और इसमें फायदा भी बहुत है। प्राकृतिक खेती के इन्हीं फायदों से प्रभावित होकर किसान पूरनलाल ने अपने खेत में प्राकृतिक पद्धति से केले की खेती करना प्रारंभ कर दिया। उन्होंने टिश्यू कल्चर से तैयार जी-9 किस्म का केला लगाया। बड़ी मात्रा में केलों का उत्पादन कर पूरनलाल ने इस साल मात्र एक…

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