‘गर्भ रखना या नहीं, फैसला महिला का अधिकार’: इंदौर हाईकोर्ट ने कहा- पति की सहमति जरूरी नहीं

इंदौर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कानून में निर्धारित अवधि के भीतर गर्भावस्था होने पर यह निर्णय पूरी तरह महिला का होगा कि वह गर्भ जारी रखना चाहती है या उसका समापन कराना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि गर्भपात के लिए पति की सहमति आवश्यक नहीं है। इसी के साथ खंडपीठ ने 13 सप्ताह की गर्भवती विवाहित महिला को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) ऐक्ट के तहत गर्भसमापन की अनुमति प्रदान कर दी। यह…

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