शहडोल शहडोल की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति से ही नहीं, बल्कि यहां के कुशल शिल्पकारों की पारंपरिक कला से भी है। वर्षों से गोंडी पेंटिंग, काष्ठ शिल्प, रॉट आयरन और कालीन-दरी जैसे हस्तशिल्प यहां के जनजातीय परिवारों की आजीविका और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे हैं। समय के साथ बदलते बाजार में इन कलाकारों के सामने अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने की चुनौती भी रही। इन्हीं चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास…
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