6 साल तक कैंसर से जूझने के बाद, दृष्टिबाधित संजय दहरिया ने तीसरे प्रयास में UPSC क्रैक किया

महासमुंद
जुनून, लगन और हार न मानने की जिद। इन सबका जीता जागता उदाहरण हैं संजय दहरिया। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के संजय दहरिया ने छह साल तक कैंसर से जूझने और तीन नौकरियां छोड़ने के बाद अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। बेलटुकरी के एक किसान के 38 साल के इस पुत्र ने अपने परिवार और गांव के लोगों को अपार गर्व और खुशी दी है।

दहरिया की शैक्षणिक यात्रा एक स्थानीय सरकारी स्कूल से शुरू हुई। कक्षा 5 में जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में चयन होने के बाद इसमें एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। दहरिया के लिए सिविल सेवाओं तक का सफर पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों ही दृष्टि से चुनौतियों से भरा था।

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पश्चिम बंगाल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 2009 से 2011 तक काम करने के बाद उन्होंने उच्च लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तीफा दे दिया। हालांकि, 2012 में उन्हें लार ग्रंथियों के कैंसर का पता चला, जिसके कारण छह साल तक उनका कठिन इलाज चला।

दृष्टिबाधित होने के बावजूद दहरिया ने हार नहीं मानी और सिविल सेवाओं में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा। उन्होंने रायपुर के एक बैंक और महासमुंद डाकघर में काम करते हुए अपने करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने 2022 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भाग लेना शुरू किया और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर 2025 में तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की।

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दहरिया ने अपनी सफलता का श्रेय बीमारी के दौरान अपने परिवार और मार्गदर्शकों के अटूट समर्थन को दिया। उन्होंने कहा कि मैं सिविल सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा करने की आशा रखता हूं। चाहे मुझे आईएएस कैडर मिले या कोई अन्य सेवा, लोक सेवा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता दृढ़ रहेगी।

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महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लांगेह और जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने दहरिया को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि की सराहना की, जो साहस और दृढ़ता का एक उदाहरण है।

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