किसान की बेटी मिशा सिंह बनीं IAS! LLB के बाद क्रैक किया UPSC, अब संभालेंगी कलेक्टर की जिम्मेदारी

शहडोल
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में 2016 बैच की आईएएस अधिकारी मिशा सिंह को शहडोल जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे रतलाम की जिला कलेक्टर और जबलपुर में एडीएम (ADM) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा पास करने तक का उनका सफर उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। "अगर इरादे पक्के हों और मेहनत में ईमानदारी हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता।" इस बात को तेजतर्रार आईएएस अधिकारी मिशा सिंह ने सच कर दिखाया है मध्य प्रदेश कैडर की।

किसान परिवार से शुरुआती शिक्षा तक का सफर
मिशा सिंह का जन्म एक ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले किसान परिवार में हुआ था। जमीन से जुड़े माहौल और माता-पिता के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को बचपन से ही एक मजबूत आधार दिया। उनके पिता एक किसान हैं, जिन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। मिशा बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थीं। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने कानून के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया और सफलतापूर्वक एलएलबी (LLB) की डिग्री हासिल की।
वकालत से सिविल सर्विसेज की ओर झुकाव

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कानून की पढ़ाई के दौरान मिशा को देश की प्रशासनिक व्यवस्था, जनसेवा और समाज में बदलाव लाने वाले अधिकारियों के काम को करीब से समझने का मौका मिला। उन्होंने महसूस किया कि वकालत के जरिए तो वे लोगों को न्याय दिला ही सकती हैं, लेकिन यदि वे प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनती हैं, तो बड़े पैमाने पर समाज के वंचित वर्गों की समस्याओं को दूर कर सकती हैं। इसी विचार ने उन्हें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।

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नाकामियों से नहीं हारीं हिम्मत, तीसरे प्रयास में मिली सफलता
यूपीएससी की तैयारी का रास्ता आसान नहीं था। देश भर के लाखों मेधावी छात्रों के बीच अपनी जगह बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। शुरुआती प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद मिशा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना, उत्तर लेखन में सुधार किया और नए सिरे से रणनीति बनाई। आखिरकार, उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 2015 में अपने तीसरे प्रयास में 64वीं रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा पास कर ली।
मध्य प्रदेश में बतौर आईएएस सेवाएं

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यूपीएससी क्रैक करने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश कैडर आवंटित हुआ। अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न पदों और जिलों में पूरी निष्ठा के साथ काम किया। बतौर कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के मोर्चे पर कई सराहनीय पहल कीं। उनकी कार्यशैली और जनता से सीधे जुड़ने के अंदाज की अक्सर तारीफ होती है।
तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए संदेश

आईएएस मिशा सिंह की सफलता यह साबित करती है कि यूपीएससी में सफलता पाने के लिए यह मायने नहीं रखता कि आप किस पृष्ठभूमि से आते हैं या आपका बैकग्राउंड क्या है। सही रणनीति, निरंतरता और खुद पर भरोसा रखने वाले छात्र किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।

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