जोधपुर
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से पैरोल के मामले में बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूर्व में जारी आदेश की पालना करते हुए आसाराम को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से इस आदेश की अनुपालना रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।
मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष हुई। आसाराम की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि कोर्ट ने अगस्त में 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने उन्हें रिहा नहीं किया।
3 अगस्त के आदेश की पालना के निर्देश
सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी, आदेश के बावजूद पैरोल लागू नहीं की गई। इस पर खंडपीठ ने राज्य सरकार को पूर्व में जारी आदेश की पालना करने के निर्देश दिए।

गुजरात कोर्ट का दिया गया हवाला
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीएल भाटी ने दलील दी कि आसाराम को गुजरात के गांधीनगर की अदालत भी एक अन्य मामले में दोषी ठहरा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात हाईकोर्ट ने उस मामले में आसाराम की पैरोल याचिका खारिज कर दी थी।
हालांकि, राजस्थान हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं बता सकी, जिससे 3 अगस्त 2026 के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त या निलंबित माना जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गुजरात हाईकोर्ट द्वारा आपातकालीन पैरोल खारिज किए जाने के आदेश का राजस्थान हाईकोर्ट के पहले के आदेश पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नहीं दी चुनौती
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार के अधिवक्ता से यह भी पूछा कि क्या 3 अगस्त के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि सरकार की ओर से ऐसा कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर नहीं किया गया है। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में 3 अगस्त को जारी आदेश की पालना की जानी चाहिए।2018 में सुनाई गई थी उम्रकैद
आसाराम को वर्ष 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जेल में सजा काट रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें समय-समय पर अस्पताल जाने की अनुमति भी मिलती रही है।
गांधीनगर का अलग मामला
इसके अलावा सूरत की दो बहनों से जुड़े यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में गांधीनगर की अदालत ने जनवरी 2023 में आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी मामले का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में पैरोल को लेकर अपनी दलील रखी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
