मकर संक्रांति आज या कल? तारीख को लेकर क्यों है भ्रम

मकर संक्रांति को लेकर इस साल लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पर्व आज यानी 14 जनवरी 2026 को मनाया जाए या फिर 15 जनवरी 2026 को. यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति आज और कल दोनों दिन मनाई जा रही है. इसके पीछे ज्योतिष, पंचांग, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कई कारण हैं. आइए आसान भाषा में पूरे मामले को समझते हैं.

क्यों है तारीखों को लेकर कंफ्यूजन?

मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. ज्योतिषियों के बीच मतभेद सूर्य के प्रवेश के समय को लेकर है. अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य आज यानी 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. वहीं, बनारस के कुछ पंचांगों का मानना है कि यह प्रवेश रात 9:19 बजे होगा. इसी समय के अंतर के कारण त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है.

ये भी पढ़ें :  अब 54 साल नहीं बदलेगी तारीख! 15 जनवरी को ही क्यों मनेगी मकर संक्रांति, जानिए खगोलीय कारण

आज 14 जनवरी कहां-कहां है धूम?

चूंकि अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य का गोचर आज दोपहर में हो रहा है, इसलिए देश के कुछ हिस्सों में ये उत्सव आज भी मनाया जा रहा है.

गुजरात और राजस्थान: यहां उत्तरायण और पतंगबाजी का मुख्य जश्न आज ही मनाया जा रहा है.

तमिलनाडु: दक्षिण भारत में थाई पोंगल का मुख्य दिन आज 14 जनवरी ही है.

शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, संक्रांति का पुण्य काल आज दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक रहेगा.

कल (15 जनवरी) क्यों मनाई जाएगी संक्रांति?

ये भी पढ़ें :  भोपाल कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! मकर संक्रांति पर मिल सकती है छुट्टी, कलेक्टर ने प्रस्ताव शासन को भेजा

उत्तर प्रदेश, बिहार और वाराणसी के विद्वान 15 जनवरी को त्योहार मनाना अधिक उचित मान रहे हैं. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं.

उदया तिथि और स्थानीय परंपरा

शास्त्रों में माना जाता है कि जो तिथि सूर्योदय के समय होती है, उसी का महत्व पूरे दिन रहता है. चूंकि आज सूर्य का प्रवेश दोपहर या रात में हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार कल 15 जनवरी को मुख्य स्नान और दान होगा.

षटतिला एकादशी और चावल का धर्मसंकट

इस बार 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है. मकर संक्रांति का मुख्य प्रसाद ‘खिचड़ी’ है, जो बिना चावल के नहीं बन सकती. ऐसे में व्रत रखने वाले लोग 14 जनवरी को खिचड़ी नहीं खा सकते, इसलिए वे 15 जनवरी को यह पर्व मनाएंगे.

ये भी पढ़ें :  आमलकी एकादशी 2026: शुभ योगों का महासंयोग, जानें क्यों की जाती है आंवले के पेड़ की पूजा

दोपहर के स्नान को लेकर शास्त्र क्या कहते हैं?

प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, शास्त्रों में दोपहर के स्नान को अच्छा नहीं माना गया है. धर्म सिंधु और नारद पुराण के अनुसार, संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन के मध्याह्न तक रहता है. इसलिए 15 जनवरी की सुबह स्नान और दान करना सबसे उत्तम है.

आपके लिए क्या है सही?

अगर आप परंपरा और पंचांग को मानते हैं, तो दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के लिए 15 जनवरी की सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ है. वहीं, अगर आप केवल उत्सव और पतंगबाजी का आनंद लेना चाहते हैं, तो 14 जनवरी को इसकी शुरुआत हो चुकी है.

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment