भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माउथ ऑर्गन भगवान कृष्ण की बांसुरी के समान है। दोनों में सातों स्वर समाहित हैं। ईश्वर ने हमारे रोम-रोम में स्वरों का स्पंदन दिया है, बारिश की बूंद के आधार पर पैदा होने वाली ध्वनि से महादेव का डमरू दुनिया का पहला वाद्य यंत्र बना। यह सौभाग्य का विषय है कि प्रदेश में महाकाल और ओंकारेश्वर 2 ज्योतिर्लिंग हैं। बाबा महाकाल हमें जीवन देते हैं और ओंकारेश्वर के ॐ की ध्वनि से ही हम संगीत का रसास्वादन करते हैं। प्रभु राम और भगवान कृष्ण के काल से ही हमारी संस्कृति में 64 कला और 14 विधाओं का विशिष्ट स्थान रहा है। हमारे सभी देवी-देवताओं के पास कोई एक वाद्य यन्त्र अवश्य मिलता है, देवताओं के हाथों में एक ओर शस्त्र नजर आता है तो दूसरी ओर शास्त्र। इन दोनों का मेल केवल सनातन संस्कृति में ही मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार 13वें भारतीय हार्मोनिका महोत्सव 2026 के अंतर्गत इंडियन माउथ ऑर्गन प्लेयर्स मीट : 2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में माउथ ऑर्गन वादकों के अखिल भारतीय सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थी।
मध्यप्रदेश की धरती से संगीत परंपरा समृद्ध हो रही है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर भोपाल में भारतीय हार्मोनिका महोत्सव के विशेष आयोजन में देश के 16 राज्यों से लगभग 180 कलाकार प्रदेश की राजधानी भोपाल में जुटे हैं। इस अद्भुत आयोजन में 7 से 87 वर्ष की आयु तक के कलाकार अपनी माउथ ऑर्गन की प्रस्तुतियों से सभी को आनंदित कर रहे हैं। यह आयोजन केवल कलाकारों का मिलन नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों की भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले हार्मोनिका के साधकों का महाकुंभ है। वर्तमान समय में मध्यप्रदेश की धरती से संगीत परंपरा समृद्ध हो रही है। राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए कला-संस्कृति, उदयीमान कलाकारों सहित प्रत्येक क्षेत्र को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण की बांसुरी भी माउथ ऑर्गन के जैसी थी। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में प्राचीन वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
राज्य सरकार कला संस्कृति को कर रही है प्रोत्साहित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरासत से विकास के संकल्प के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार कला-संस्कृति क्षेत्र को विशेष प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। प्रदेश की सांगीतिक परम्परा संगीत सम्राट तानसेन, बैजू बावरा और कुमार गंधर्व जैसी विभूतियों से समृद्ध रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की कल्पना की है। प्रधानमंत्री मोदी अपने "मन की बात" कार्यक्रम में देश के प्राचीन वाद्यों के कलाकारों का जिक्र करते हैं। भारत सरकार वाद्य यंत्रों के साधकों को पद्म पुरस्कार देकर सम्मानित भी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय गीत-संगीत की परंपरा में बंगाल के कलाकारों का विशेष योगदान रहा है। प्रसिद्ध संगीतकार आरडी बर्मन और सचिन देव बर्मन, मिलन गुप्ता, अशोक भंडारी और उनके शिष्यों ने अपनी साधना से देश-दुनिया में भारत का नाम रौशन किया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती खंडवा से ही निकलकर किशोर कुमार देश के महान गायक बने। कार्यक्रम में 7 से लेकर 87 वर्ष के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियों से बांधा समां।
कार्यक्रम में 17 वर्षीय सु सिद्धि सोनी ने महात्मा गांधी के प्रिय भजन "वैष्णव जन…" से शुरुआत कर "रघुपति राघव राजा राम" सहित अनेक भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर 87 वर्षीय वी.एम. त्रिवेदी और भारतीय हार्मोनिका ग्रुप के संस्थापक अनुपम पॉल ने "आ जा सनम मधुर चांदनी में…" जैसी सुमधुर धुनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर कर्नाटक के बेंगलुरू से आए सांई तेजस ने शम्मी कपूर के फिल्मी गीतों पर हार्मोनिका की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माउथ आर्गन वादकों की प्रस्तुतियों की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मन शुक्ला, मती कल्पना वास्तव, प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे उपस्थित थे।
